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मंगलवार, 31 अगस्त 2010

बहन क्यों रोती हो?

:: हंसने से चिंता, दुख,गुस्से, चिड़चिड़ेपन,आदि से निज़ात मिलती है। ::

बहन क्यों रोती हो?


यह वाकया उस दिन का है जब खदेरन की शादी हुई थी और फुलमतिया जी की अपने मायके से विदाई हो रही थी।
डाउनलोड करें परंपरा के अनुसार सब कुछ हुआ, यहां तक की फुलमतिया जी विदाई के अवसर पर रोए भी जा रही थी। उनको रोते देख फुलमतिया जी का भाई चटोरन दीदी के पास गया और बोला, “दीदी क्यों रो रही हो? चुप हो जाओ?” और फिर उसने अपने जीजा खदेरन की ओर इशारा करके बोला, “आज से जीवन भर रोना तो इनको है!”

सोमवार, 30 अगस्त 2010

ग़लती हो गई!

हंसना ज़रूरी है, क्यूंकि …


:: हंसने से टी सेल्स की संख्या में वृद्धि होने से हृदय रोग की कम संभावना होती है।

ग़लती हो गई!


फाटक बाबू खाने के टेबुल पर बैठे थे। उनका नौकर बुहारन खाना परोस गया। खाने का रूप-रंग देखकर फाटक बाबू की त्योरियां चढ गई। उन्होंने बुहारन से पूछा, “आज तुमने रोटी में कुछ ज़्यादा ही घी नहीं लगा दिया है?”

बुहारन ने डायनिंग टेबुल का मुयायना किया और स्थिति को स्पषट करते हुए कहा, “ग़लती हो गई! मालिक! लगता है मैंने आपको अपनी रोटी दे दी!!”

रविवार, 29 अगस्त 2010

डॉक्टर की फीस

:: एक मुस्कान ही शांति की शुरुआत है! ::

डॉक्टर की फीस


उस दिन फाटक बाबू बड़े बेचैन से थे। घबराहट और बेचैनी की वजह से वो इधर-उधर घूम रहे थे। फाटक बाबू को परेशान हाल देख खदेरन ने उन्हें सलाह दिया (?!), “आप डॉक्टर को दिखा क्यों नहीं लेते?”

फाटक बाबू ने खदेरन की सलाह पर अमल करना ही उचित समझा और पहुँच गए डॉक्टर उठावन सिंह की क्लीनिक।
डॉक्टर
उठावन सिंह  ने पूछा, “क्या हुआ है?”

फाटक बाबू ने बताया, “कुछ नहीं बस मामूली सा दर्द है।”

डॉक्टर उठावन सिंह ने निरीक्षण किया और घोषणा की, “आप तो मामूली दर्द बता रहे थे, लेकिन आपकी तो दिल की धड़कन भी बहुत बढी हुई है।”

फाटक बाबू बोले, “हां, जी, वो ओ आपकी फीस का बिल देख कर बढ़ी है।”

शनिवार, 28 अगस्त 2010

आने जाने में …

हंसना ज़रूरी है, क्यूंकि …


हंसने से हम मन की शक्ति का अधिक से अधिक प्रयोग कर पाते हैं।

आने जाने में …


आपको तो मालूम है फाटक बाबू ने गाड़ी ख़रीद ली है। पुरानी है तो क्या हुआ?

चलाना भी सीख लिया है, नवसिखुआ हैं तो क्या हुआ?

एक दिन उन्होंने खंजन देवी को कहा, “गाड़ी तो अब चलाना सीख ही गया हूँ। सोचता हूँ गांव हो आऊँ।”

maan_manthara खंजन देवी ने पूछा, “कब लौटेंगे?”


 

फाटक बाबू बोले, “कल शाम तक। कोई वहां रुकना थोड़े ही है। लोगों को गाड़ी दिखाना है। बस!”

… और फाटक बाबू चल दिए गांव के लिए। खंजन देवी उनके लौटने की प्रतीक्षा करती रहीं। फाटक बाबू लौटे छह दिनों के बाद।

maan_manthara चिंतित खंजन देवी ने पूछा, “आप तो बोले थे कि दूसरे दिन ही लौट आऊँगा, पर इतने दिन लगा दिए?”

फाटक बाबू ने बताया, “जाने में तो एक ही दिन लगा पर आने में पांच दिन लग गए।”

maan_manthara खंजन देवी की चिंता न मिटी। पूछी, “क्यों?”


 

फाटक बाबू ने बताया, “ये कार बनाने वाले भी ग़ज़ब के लोग हैं! जाने के लिए तो पांच गियर बनाए हैं, पर लौटने के लिए सिर्फ़ एक गियर है - (रिवर्स गियर!)।”

शुक्रवार, 27 अगस्त 2010

आज सिर्फ़ एक चित्र…

आज सिर्फ़ एक चित्र…

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बताइए इस चित्र का शीर्षक क्या हो? …. शीर्षक ऐसा हो जिससे हास्य का सृजन हो…

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एक शीर्षक तो मैं ही दे रही हूं …

मम्मी…!!

गुरुवार, 26 अगस्त 2010

बुझावन के प्रश्‍न, बतावन का जवाब!-4

हंसना ज़रूरी है क्यूंकि …


हंसने से मस्तिस्क को ऑक्सीजन मिलता है।

बुझावन के प्रश्‍न, बतावन का जवाब!-4

बुझावान : ये बताइए कि कंप्यूटर और औरतों में क्या समानता है?

बतावन : ज्यों ही आपने इनमें से किसी के साथ भी  कमिट्मेंट किया, आपको पता चलता है कि आपकी आधे से अधिक आमदनी इनको  मेंटेन करने के ऊपर ख़र्च हो रहा है।

 

बुझावान : हूं! अच्छा ये बताइए कि कंप्यूटर और पुरुषों में क्या समानता है?

बतावन : ज्यों ही आपने किसी के साथ कमिट किया कि आप महसूस करते हैं कि इससे बेहतर मॉडल उपलब्ध है।

बुधवार, 25 अगस्त 2010

परीक्षा के परिणाम

:: हंसे मुस्कुराएं, शांति फैलाएं!! ::

परीक्षा के परिणाम

खदेरन, फुलमतिया और उनके सुपुत्र भगावन से अब तक तो आप भलि-भांति परिचित हो ही चुके हैं।

आज आपको उस दिन का किस्सा सुनाती हूं जिस दिन भगावन की पहली परीक्षा का परिणाम आया था।
खदेरन फुलमतिया - Copy (2) खदेरन कहीं बाहर गया था। शाम  में उसके घर में घुसते ही फुलमतिया जी बोलीं, “बच्चों की परीक्षा के परिणाम आ गए।”
खदेरन फुलमतिया - Copy खदेरन ने उत्सुकता से पूछा, “क्या हुआ?!”
खदेरन फुलमतिया - Copy (2) फुलमतिया जी बोलीं, “पड़ोसन झुलनिया की बेटी को 99 प्रतिशत अंक आए हैं।”
खदेरन फुलमतिया - Copy खदेरन को आश्चर्य हुआ। उसने कहा, “अच्छा….?! लेकिन उसके एक प्रतिशत अंक कहां गए?”
खदेरन फुलमतिया - Copy (2) फुलमतिया जी ने बताया, “वो हमारा बेटा भगावन ले आया है!”

मंगलवार, 24 अगस्त 2010

प्यार से बोला …

हंसना ज़रूरी है, क्यूंकि …


हा-हा … हा-हा करके हंसने से धमनियों और शिराओं का फैलाव होता है और वे फ्लेक्सिबल हो जाती हैं। इससे ब्लड सर्कुलेशन सुचारू रूप से होता है।

प्यार से बोला …


एक बार खदेरन कहीं जा रहा था। इतने में बम विस्फोट हुआ और अन्य लोगों के साथ वह भी घायल हो गया।

दारोगा दहारन सिंह जांच करने वाले दारोगा दहारन सिंह ने घायल खदेरन से पूछा, “क्या जब तुम वहां खड़े थे तो बम तब फट गया था?”

खदेरन फुलमतिया - Copy खदेरन को गुस्सा आ गया। वह बोला, “नहीं, … बम चुपके से मेरे पास रेंगकर आया और बड़े प्यार से बोला, ठा …..!”

सोमवार, 23 अगस्त 2010

चुप, वरना …

हंसना ज़रूरी है, क्यूंकि …


सांस को बाहर की ओर निकालते हुए खुलकर हो-हो .. हो-हो करके हंसने से नाभि पर प्रभाव पड़ता है, जिससे लीवर और कीडनी मज़बूत होते हैं और उनकी कार्य क्षमता बढ़ती है।

चुप, वरना …


खदेरन बाज़ार से गुज़र रहा था तो उसने देखा कि एक फल वाला अंगूर बेच रहा है लेकिन बोल रहा है ….
”आलू ले लो आलू …”
खदेरन फुलमतिया - Copy - Copy उसे यह सुन कर रहा नहीं गया और उसने उस फलवाले से पूछ ही लिया, “तुम तो भाई अंगूर बेच रहे हो तो फिर आलू ले लो आलू … क्यों बोल रहे हो?”

फलवाले ने खदेरन को समझाया, “चुप, वरना मक्खियां सुन लेंगी।”

रविवार, 22 अगस्त 2010

खांसी चली जाएगी

खांसी चली जाएगी

एक बार फिर शाम के वक़्त खदेरन पहुंच गया दोस्तों की महफ़िल में। अब आपको तो पता है ही कि जब खदेरन दोस्तों के साथ होता है, तो क्या होता है?


ख़ैर उसके परम मित्र फेंकू दास ने खदेरन को ऑफर किया, “आजा! … हो जाय!!”

खदेरन फुलमतियाखदेरन ने उस दिन आनाकानी की, “नहीं – नहीं, यार फेंकू! आज नहीं!" आज मुझे बड़ी ज़ोर की सर्दी-खांसी है।”

अब मित्र मंडली ऐसे कहां मानने वाली होती है। फेंकू ने ज़ोर दिया, “अरे! कुछ नहीं होता यार। लगा ले। सब ठीक हो जाएगा। सर्दी-खांसी चली जाएगी।”

खदेरन फुलमतियाखदेरन फिर भी आश्‍वस्त नहीं हुआ और उसने पूछा, “क्या दारू पीने से सर्दी-खांसी चली जाती है?”

बगल में बैठा, चार पेग लगा चुका, हुलासी प्रसाद, जो अब तक चुप था, बोला, “क्यों नहीं जाएगी? ज्ब दारू पीने से मेरा घर, ज़ायदाद, पैसा, जमा पूंजी, सब कुछ चला गया, … तो तेरी सर्दी-खांसी क्या चीज़ है! पी ले!!”

शनिवार, 21 अगस्त 2010

क्या ऐश है …!

हंसना ज़रूरी है, क्यूंकि …

बिना आवाज़ किए हल्की सी मुस्कुराहट के साथ हंसने से चेहरे की त्वचा अच्छी हो जाती है और चेहरा दमकने लगता है।

क्या ऐश है …!


फाटक बाबू एक दिन बाज़ार गये। बाज़ार में उनको एक भिखारी मिल गया। भिखारी जाना पहचाना था। वह फाटक बाबू से पैसे मांगने लगा। फाटक बाबू ने उसे एक रुपये का सिक्का दिया।


buddha एक रुपए का सिक्का देखते ही भिखारी बोला, “क्या साहब! ये एक रुपया? आप पहले मुझे दस रुपये देते थे। फिर पांच रुपये देने लगे और अब तो हद ही कर दी, एक रुपया? ऐसा क्यों?”

फाटक बाबू ने समझाया, “पहले मैं कुंवारा था, फिर मेरी शादी हुई और अब बच्चे भी हो गए हैं, इस लिए एक रुपए!”

buddha भिखारी यह सुन कर बोला, “वाह साहब! खूब, मेरे पैसों से क्या ऐश हो रही है आपकी!”

शुक्रवार, 20 अगस्त 2010

आज सिर्फ़ एक चित्र…

आज सिर्फ़ एक चित्र…


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बताइए इस चित्र का शीर्षक क्या हो? …. शीर्षक ऐसा हो जिससे हास्य का सृजन हो…

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एक शीर्षक तो मैं ही दे रही हूं …

चियर्स…!!

गुरुवार, 19 अगस्त 2010

बुझावन के प्रश्‍न, बतावन का जवाब!-3

हंसना ज़रूरी है क्यूंकि …


हंसने से सकारात्मक ऊर्जा का विकास होता है।

बुझावन के प्रश्‍न, बतावन का जवाब!-3

बुझावान : ये बताइए कि कंप्यूटर और औरतों में क्या समानता है?

बतावन : आप बरसों तक एक ही काम को करते जाएं, अचानक आपको पता चलता है कि यह ग़लत है।

 

बुझावान : हूं! अच्छा ये बताइए कि कंप्यूटर और पुरुषों में क्या समानता है?

बतावन : ऐसा माना जाता है कि वे आपकी समस्याओं का समाधान करेंगे, पर आधे वक़्त तो वो ख़ुद ही एक समस्या होते हैं।

बुधवार, 18 अगस्त 2010

घुटने टेक कर…

हंसना ज़रूरी है, क्यूंकि …

हंसने से हम मन की शक्ति का अधिक से अधिक प्रयोग कर पाते हैं।

घुटने टेक कर…

आपको तो पता है ही कि फाटक बाबू खदेरन के पड़ोसी हैं। तो खदेरन के घर जो भी खटर-पटर होती है, फटक बाबू को पता चल ही जाता है।

 

उस दिन सुबह से ही किसी बात पर फुलमतिया जी बिगड़ी हुई थीं। खदेरन भी कुछ न कुछ बोले ही जा रहा था। खदेरन और फुलमतिया जी की इस खटर-पटर से फाटक बाबू को तो आए दिन वास्ता पड़ता ही रहता था। कोई नई बात नहीं थी।

 

नई बात यह थी कि थोड़ी ही देर बाद उन्होंने देखा, खदेरन बाहर आ गया है, और भीतर शांति है। फाटक बाबू उसके पास पहुंचे और पूछा, “पत्नी से लड़ाई खतम हो गई?”

 

खदेरन फुलमतियाखदेरन ने वीर रस में जवाब दिया, “और नहीं तो क्या … फुलमतिया जी घुटने टेक कर मेरे पास आई … तो लड़ाई को खतम करना पड़ा।”

 

फाटक बाबू को खदेरन के इस उत्तर से काफ़ी हैरानी हुई। उन्होंने कहा, “अच्छा! फुलमतिया जी ने घुटने टेक दिए?!”

 

खदेरन ने अपना वीर रस बरकरार रखते हुए कहा, “और नहीं तो क्या…!?”

 

फाटक बाबू को यह हास्य रस से कम नहीं लगा, फिर भी उन्होंने पूछा, “फुलमतिया जी ने घुटने टेक कर क्या कहा?”

 

[Copy2.jpg]खदेरन का स्वर करुण रस में डूब गया, बोला, “कहना क्या था, इस बार और कोई उपाय नहीं देख … फुलमतिया जी को घुटने टेक कर ही आना पड़ा मेरे पास, आईं और झुक कर मेरी आंखों में आंखें डल कर बोलीं, पलंग के नीचे से निकल आओ, मैं कुछ नहीं बोलूंगी…।”

मंगलवार, 17 अगस्त 2010

आटा गूंथ दो..!

हंसना ज़रूरी है, क्यूंकि …


सांस बाहर की ओर छोड़ते समय रुक-रुक कर हंसने से शरीर के कई महत्वपूर्ण हिस्सों में रक्त का संचार सुचारू रूप से होता है, जिससे ये अंग मज़बूत होते हैं।

आटा गूंथ दो..!

बात तब की है जब खदेरन की नई-नई शादी हुई थी।

चूल्हा छुआने की रस्म भी पूरी हो गई थी। तो अब घर की बहू को ससुसाल में पहली बार खाना बनाना था।

Image लगता है नई-नई शादी के जोश में खदेरन कुछ चुहलबाज़ी के मूड  में था। किचन में घुस आया और फुलमतिया जी से बोला, “फुलमतिया  जी! आप ऐसी रोटी बना सकती हैं, जैसी मेरी Image माँ पकाती है।”

उस दिन पहली बार खदेरन को फुलमतिया जी के असल रूप से परिचय हुआ। फुलमतिया जी बोलीं, “क्यों नहीं! बस तुम वैसा ही आटा गूंथ जो जैसा तुम्हारे पिताजी गूंथा करते हैं।”