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गुरुवार, 30 सितंबर 2010

बुझावन के प्रश्‍न, बतावन का जवाब-9

बुझावन के प्रश्‍न, बतावन का जवाब-9

बुझावान : ये बताइए कि दफ़्तरों में अपने कैरियर के प्रति सचेष्ट (CAREER MINDED) किस तरह के कर्मचारियों को कहा जाता है?

बतावन : लोगों की पीठ में छूरा घोंपने (BACK STABBER) वाले को!

बुधवार, 29 सितंबर 2010

अहमियत

अहमियत

सुबह सुबह फटक बाबू और खंजन देवी नाश्ता के टेबुल पर बैठे नाश्ता कर रहे थे। तभी खंजन देवी ने कहा, “एक बात मैं शर्त लगा कर कह सकती हूं, कि आज का दिन आपको याद नहीं होगा।”

फाटक बाबू दफ़्तर जाने की हड़बड़ी में थे। नाश्ते के टेबुल पर तो कुछ नहीं बोले, पर दफ़्तर जाने से पहले थोड़ा नराज़ स्वर में बोलते गए, “बिल्कुल याद है!” और फाटक बाबू निकल गए।

खंजन देवी उनको जाते हुए देखती रही।

१० बजे कॉल बेल बजी। खंजन देवी ने दरवाजा खोला तो सामने दफ़्तर का चापरासी एक बुके खंजन देवी को थमा गया। बोला साहब ने भिजवाया है।

१२ बजे फिर कॉल बेल बजी। खंजन देवी ने दरवाजा खोला तो सामने दफ़्तर का चापरासी चौकलेट से भरा बक्सा खंजन देवी को थमा गया। बोला साहब ने भिजवाया है।

२ बजे फिर कॉल बेल बजी। खंजन देवी ने दरवाजा खोला तो सामने दफ़्तर का चापरासी बुटिक से डिजाइनर ड्रेस खंजन देवी को थमा गया। बोला साहब ने भिजवाया है।

image0044 खंजन देवी फाटक बाबू के दफ़्तर से आने की प्रतीक्षा आज बड़ी बेसब्री से कर रही थी। ६ बजे फिर कॉल बेल बजी। खंजन देवी ने दरवाजा खोला तो सामने फाटक बाबू थे। खंजन देवी बोलीं, “पहले पुष्प गुच्छ, फिर चौकलेट, फिर इतना सुंदर ड्रेस, मुझे पता नहीं था कि मेरी मम्मी का जन्मदिन आपके लिए इतनी अहमियत रखता है।”

मंगलवार, 28 सितंबर 2010

बिजली गुल हो गई।

खुलकर हंसने और हंसकर आस-पास का वातावरण प्रसन्न रखने वाले व्यक्ति का वृद्धत्व आने पर भी स्वास्थ्य व सौंदर्य बना रहता है।

कक्षा में अध्यापिका ने भगावन से पूछ, “भगावन! कल जो पाठ दिया गया था, उसे याद किया तुमने?”

भगावन ने कहा, “नहीं मैम!”

अध्यापिका ने गुस्से  में पूछा, “क्यों?”

भगावन ने बताया, “मैम! कल शाम में मैं जैसे ही पढने बैठा तो बिजली गुल हो गई।”

अध्यापिका ने पूछा, “तो क्या फिर लाइट आई ही नहीं?”

भगावन ने बताया, “आई मैम! पर इस डर से मैं पढने नहीं बैठा कि कहीं मेरी वजह से फिर बिजली न चली जाए।”

रविवार, 26 सितंबर 2010

कंजूस-मक्खीचूस

कंजूस-मक्खीचूस

सेठ मक्खीचंद मृत्युशैय्या पर थे.  उन्होंने अपने बेटे करमकीट को बुला करा कहा, "बेटा अब मेरी जिन्दगी का कोई ठिकाना नहीं. यह पांच रूपये लो और झट से बाजार से एक माला ले आओ."

image011 करमकीट, "मगर बाबू जी.... ?"

सेठ मक्खीचंद, "अरे ! अगर मगर क्या ? फट से ले आ और मेरे गले में डाल कर एक फोटो ले ले.... वरना कहीं पहले मर गया तो हर साल एक माला चढ़ाना पड़ेगा... !!”

शनिवार, 25 सितंबर 2010

डेट का पता

डेट का पता

भगावन को उसके दोस्‍त जियावन ने बताया, “मेरे अंकल को उनके मरने से पहले मरने की डेट पता था।”

भगावन को आश्‍चर्य हुआ! पूछा, “कैसे?”

 

जियावन ने बताया, “उन्‍हें यह डेट जज ने बताई थी।”

शुक्रवार, 24 सितंबर 2010

आज सिर्फ़ एक चित्र…

आज सिर्फ़ एक चित्र…


ये ई-मेल से प्राप्त हुआ। सोचा आपसे शेयर कर लूं।


बताइए इस चित्र का शीर्षक क्या हो? …. शीर्षक ऐसा हो जिससे हास्य का सृजन हो…

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एक शीर्षक तो मैं ही दे रही हूं …

ये … लो … तंदूरी चिकन…!!

गुरुवार, 23 सितंबर 2010

बुझावन के प्रश्‍न, बतावन का जवाब!-8

बुझावन के प्रश्‍न, बतावन का जवाब!-8

बुझावन : डॉक्‍टर अपने प्रेस्क्रिप्‍शन पर क्‍या लिखते हैं कि मरीज को कुछ समझ नहीं आता, पर दुकानदार समझ जाता है!

बतावन : उसमें लिखा होता है, मैं तो इसे लूट चुका, अब तू भी लूट!

बुधवार, 22 सितंबर 2010

तीन गो बुरबक! (थ्री इडियट्स!)

तीन गो बुरबक! (थ्री इडियट्स!)

हमरे गांव में भी तीन गो बुरबक है। उ का है कि जब से एगो फ़िलिम का हिट हुआ गांव के पराइमरी ईसकूल के गुरुजी अपना नाम वीर सिंह से भायरस कर लिहिन हैं और उनका चेला रामचन्नर से नाम बदल कर रैन्चो रख लिहिस आ दूसरा त रजुआ था ही।

त एक दिन किलास में भायरस गुरुजी पूछे, "जिस सभा में एगो लोग  बोले और बांकी सब सुनें, उसे क्या कहते हैं, बोलो?

त टप्प से रैंचोआ बोला, "सोकसभा!"

भायरस गुरूजी परसन्न हुए और दोसरका प्रस्न दाग दिए, "आ ई बताओ कि जिस सभा में सब लोग बोले और कोई नहीं सुने, उसे का कहते हैं, बोलो-बोलो?”

राजुआ मुंह खोले इसके पहिले रैंचोआ फेर टपका बोला, "लोकसभा!"

मंगलवार, 21 सितंबर 2010

उपाय!

उपाय!

खदेरन फुलमतिया भगावन की नालायकी से तंग फुलमतिया जी ने एक दिन अपने पति खदेरन से कहा, “सुनो जी! भगावन पैसे बहुत उड़ाने लगा है! जहां भी रखो खोज लेता है और खर्च कर देता है। क्‍या किया जाए?”

खदेरन फुलमतिया - Copy खदेरन ने उपाय बताते हुए कहा, “नालायक की किताब में पैसे रख दो, इम्‍तहानों तक रूपये सुरक्षित रहेंगे। ”

सोमवार, 20 सितंबर 2010

परवाह

परवाह

[Image.jpg]फुलमतिया जी खदेरन में आए व्यवहार परिवर्तन से मन ही मन दुखी थीं। पर वो बोलने में संकोच कर रही थीं। उन्हें उसका रूखा-रूखा व्यवहार हरदम सालता रहता था। जब मामला हद से गुज़रने लगा तो एक दिन बोल ही पड़ीं, “क्या तुम मुझे प्यार करते हो?”


[Copy2.jpg]खदेरन पहले तो इस प्रश्‍न से चौंका, फिर बिना कोई पंगा लिए बोला, “हां!”

 

फुलमतिया जी उसके इस उत्तर से असंतुष्ट हो रूठे स्वर में बोलीं, “लेकिन तुम्हें तो मेरी कोई परवाह ही नहीं है।”

खदेरन तपाक से बोला, “ओए जानेमन! प्यार करनेवाले किसी की परवाह नहीं करते!”

रविवार, 19 सितंबर 2010

तेज़ आवाज़ में

28gyofq_th.jpgखुलकर हंसने और हंसकर आस-पास का वातवरण प्रसन्न रखनेवाले व्यक्ति का वृद्धत्व आने पर भी स्वास्थ्य व सौंदर्य बना रहता है।  2my1auc_th.jpg

तेज़ आवाज़ में

खदेरन फुलमतिया - Copy - Copy उस दिन भगावन, खदेरन का बेटा, बहुत ज़ोर-ज़ोर से अपनी मम्मी से बात कर रहा था। खदेरन ने उसे अपने पास बुलाया और कहा, “क्या भगावन, आज फिर तू ने मम्मी से तेज़ आवाज़ में बात की?”


भगावन भी फुलमतिया जी का ही बेटा है, बोला, “मुझे मालूम है डैड, आप मुझसे जलते हैं, क्यूंकि आप ऐसा नहीं कर सकते!”10holmp_th.jpg

शनिवार, 18 सितंबर 2010

इतनी दूर

इतनी दूर

भगावन स्कूल में था। उसकी शिक्षिका ने कहा, “बच्‍चों कल सूरज पर एक लेक्‍चर होगा, तुम सबको ज़रूर आना होगा।”

सारे बच्चे तो चुप रहे पर भगावन ने बड़े मासूमियत से जवाब दिया, “ मैडम! मैं नहीं आ सकूँगा। मेरी मम्‍मी मुझे इतनी दूर नहीं जाने देगी।”

शुक्रवार, 17 सितंबर 2010

आज सिर्फ़ एक चित्र…

आज सिर्फ़ एक चित्र…


ये ई-मेल से प्राप्त हुआ। सोचा आपसे शेयर कर लूं।


बताइए इस चित्र का शीर्षक क्या हो? …. शीर्षक ऐसा हो जिससे हास्य का सृजन हो…

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एक शीर्षक तो मैं ही दे रही हूं …

हाउज़ दैट…!!

गुरुवार, 16 सितंबर 2010

बुझावन के प्रश्‍न, बतावन का जवाब!-7

हंसना ज़रूरी है, क्यूंकि …


दिल खोलकर और ताली पीट्ते हुए हंसने से ब्लड सर्कुलेशन और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है।

बुझावन के प्रश्‍न, बतावन का जवाब!-7


बुझावन : अच्छा ये बताओ इंद्रधनुष और पुलिसवालों में क्या समानता होती है?

 

 

बतावन : दोनों तूफान के गुज़रने के बाद ही नज़र आते हैं!

बुधवार, 15 सितंबर 2010

हंसने का मौक़ा

x5umpd_th.jpgसौंदर्य बढाने के लिए हंसना ज़रूरी है।

  हंसने का मौक़ा

तब फूलमतिया जी की शादी का रिश्ता पक्का नहीं हुआ था। बात-चीत चल रही थी। खदेरन लड़की देख कर पसंद करने गया था।
जब देखने का काम हो गया तो फुलमतिया जी की मां चम्पई देवी ने पूछा, “लड़का कैसा लगा?”

खदेरन फुलमतिया - Copy (2)फूलमतिया जी तो शुरु से वैसी ही थीं। जवाब देने के बदले प्रश्‍न दाग दिया, “तुम बताओ कैसा है?”

तो मम्मी चम्पई देवी बोलीं, “लड़का तो ठीक-ठाक है। पर, जब हंसता है तो इसके दांत बिल्कुल भी अच्छे नहीं लगते।”

खदेरन फुलमतिया - Copy (2) यह सुन फुलमतिया जी बोलीं, “ तू चिंता मत कर! वैसे भी मैं शादी के बाद इसे हंसने का मौक़ा कब दूंगी!”

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