समर्थक

शनिवार, 19 मार्च 2011

हैप्पी होली!!

अब होली के अवसर पर आप सबों से मुखातिब हो ही लूं। कुछ दिनों से हास्य फ़ुहार के साथ न आ सकी। विवश थी। डॉक्टर की सलाह पर सम्पूर्ण बिस्तर विश्राम में हूं।

समझे नहीं?

अरे क्या कहते हैं उसे … अंग्रेज़ी में .. भला तो उस डॉक्टर ने कहा था। हां याद आया .. Complete Bed Rest .. सम्पूर्ण बिस्तर विश्राम .. हुआ कि नहीं।

डॉक्टर ने तो चेतावनी दे दी थी कि मैंने यदि सम्पूर्ण बिस्तर विश्राम नहीं किया तो होस्पिटल में दाखिला (Admit) कर देंगे! अब बताइए ये भी कोई बात हुई? दखिला तो स्कूल-कॉलेज में होता है। जहां पढाई लिखाई से मेरा रिश्ता ३६ का ही रहा। किसी तरह मैथिली जैसे विषय से स्नातक कर लिया .. ताकि अंगरेज़ी से पीछा छूटे। पर अंग्रेज़ी .. उफ़्फ़ .. पीछा ही नहीं छोड़ती। जहां जाओ वहीं अंग्रेज़ी। मैं तो समझ नहीं पाती। किसी तरह अनुवाद करके कुछ न कुछ अर्थ निकाल ही लेती हूं, समझ – समझा लेती हूं।

अब देखिए ना .. वो टाइटेनिक देखी तो उसका नाम रख दिया ..नौआ देलकई धोखा।

एनाकोंडा माने बहुत बड़का संपवा।

तीन गो बुरबक त था ही थ्री इडियट्स।

इस सब का कारण है।

जब अंग्रेज़ी की क्लास होती थी तो मुझे सारी दुनियां बहुत दिलचस्प नज़र आती थी। यहां तक कि खाली दीवार को देखना भी बहुत अच्छा लगता था।

जब से हास्य फ़ुहार का चस्का लगा, कम्प्यूटर पर आना पड़ा। और आ के यहां भी पछताना पड़ा। यहां भी पीछे पड़ गई अंग्रेज़ी। मैंने भी उनके अपने अर्थ बना लिए। देखिए ..

सेव – बचाओ

सेव ऐज़ – ऐसे बचाओ

सेव ऑल – सबको बचाओ

हेल्प – मुझे बचाओ

सेव एंड एग्ज़िट – बचा कर भागो।

पर होली में कोई बच कर न भागे।

हैप्पी होली!!

रविवार, 13 मार्च 2011

फुलमतिया जी का पारा

खदेरन पर फुलमतिया जी के मायके चले जाने की धमकी का भी कोई असर नहीं हुआ। बल्कि उल्टे खदेरन ने टके सा जवाब दे दिया। इस पर फुलमतिया जी का पारा सातवें आसमान पर चढ गया। उनको इस कदर चीखते-चिल्लाते देख खदेरन को बेहद आश्चर्य हो रहा था। बोला, “शादी के बाद पहले साल आप मुझे चंद्रमुखी लगी थीं। दूसरे साल सूरज मुखी लगी थीं और आज तो एक दम ज्वालामुखी नज़र आ रही हैं।”

यह सुन अपना मुंह बिचकाते हुए फुलमतिया जी बोलीं, “…. और तुम पहले साल मुझे पाणनाथ नज़र आए थे, दूसरे साल सिर्फ़ नाथ नज़र आए थे और आज तो एकदम अनाथ लग रहे हो। समझे?”

शनिवार, 12 मार्च 2011

रिझाने की कोशिश

खदेरन और फुलमतिया जी के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया।

दोनों जब जमकर लड़ चुके तो फुलमतिया जी ने चीखते हुए कहा, “मैं जा रही हूं मायके और वहां जाकर तालाक के लिए मुकदमा दायर कर दूंगी, हां।”

खदेरन ने कहा, “चलो हटो! अब ऐसी झूठी-मूठी, मीठी-मीठी बातें करके रिझाने की कोशिश मत  करो।”

शुक्रवार, 11 मार्च 2011

खेलावन को प्रेम हो गया। पर उसे साहस नहीं हो रहा था अपने प्रेम का इज़हार करने का। दोस्तों के समझाने बुझाने पर किसी तरह उसने एक दिन कह ही दिया, “I Love you !”

लड़की ने झिडकते हुए कहा, “तमीज़ से बात करो।”

खेलावन ने जवाब दिया, “With due respect I beg to say that  I Love you"

बुधवार, 9 मार्च 2011

तलाक

वकील, ‘तलाक करवाने के पांच हजार रुपए लगेंगे।’

मुवक्किल, ‘कैसी बात कर रहे हैं वकील साहब, पंडित जी ने शादी तो 51 रुपए में करवा दी थी!’

वकील, ‘सस्ते काम का नतीजा देख लिया न?’

मंगलवार, 8 मार्च 2011

भविष्यफल

 

एक आदमी ज्योतिषी से: मेरी शादी क्यूँ नहीं हो रही है....?

ज्योतिषी : कैसे  होगी ? कुंडली में सुख ही सुख लिखा है....!

रविवार, 6 मार्च 2011

सज़ा मिलेगी

आपको तो याद होगा, पिछले दिनों की बात। पहली बार खदेरन ने फुलमतिया जी को जवाब दे दिया था। याद ताज़ा करने के लिए यहां क्लिक करें।

फुलमतिया जी के प्रश्न का खदेरन ने जवाब दे दिया,

और जवाब क्या दिया, उसने तो उनकी बात भी काट दी।

इस पर तो फुलमतिया जी पूरी तरह भड़क गईं।

गुस्से से तमतमायी बीवी बोली

“आजकल बहुत बोलने लगे हो,

लगता है जैसे सोते से जगे हो

अब तुम तो क्या

आज तुम्हारी निंद भी जगेगी

इस धृष्टता की तुम्हें बरोबर सज़ा मिलेगी!images (26)

जो भी कहूं वो बिल्कुल ही नहीं जंचती है

मेरी बात तुमको सही नहीं लगती है।

अब तुम अपनी खैर मनाओगे

आज के बाद तुम मेरी आवाज़ नहीं सुन पाओगे।”

 

खदेरन ने बड़े भोलेपन से कहा,

“अहा!

गुस्से में भी लगती तुम निराली हो

आवाज़ नहीं सुन पाऊंगा तुम्हारा

क्या, तुम गूंगी होने  वाली हो?”

 

यह सुन जाता रहा संयम रहा-सहा

फुलमतिया जी ने त्योरी चढाते हुए कहा,

“हां-हां मेरा ढंग अजब और मैं निराली हूं

गूंगी मैं नहीं, तुम्हें बहरा करने वाली हूं।”

शनिवार, 5 मार्च 2011

तोता

खदेरन को फुलमतिया जी का आदेश हुआ, “बाज़ार से तोते खरीद कर ले आओ! मुझे तोते पालने हैं।”

हुक्म की तामील करते हुए खदेरन बाज़ार पहुंचा। वह पालतू पक्षियों की दुकान पर गया। दुकान में अन्य पंक्षियों के अलावा तीन तोते टंगे हुए थे। उसने दाम पूछा।

दुकानदार ने बताया, “ये पहला वाला 500 रुपये का, यह दूसरा वाला1000 रुपये का और यह तीसरा वाला 2000  रुपये का।”

खदेरन को आश्चर्य हुआ। बोला, “तोते बहुत महंगे हैं। उस पर से उनके अलग-अलग दाम क्यों रखा है?”

दुकानदार ने समझाया, “इस पहले वाले, लाल तोता का दाम 500 रुपये इसलिए है कि यह कंप्यूटर चलाना जानता है।”

“अच्छा, और इस दूसरे वाले का 1000 रुपये क्यों?”

“यह नीला तोता, यह बहुत समझदार है और  यह कंप्यूटर के अलावा ऑफिस का भी कई काम कर सकता है।”

 

“अच्छा!! और तीसरा वाला … इसका 2000  रुपये किसलिए? इसमें क्या खासियत है??”

“यह सफ़ेद तोता, सच कहूं तो, तो मैंने कभी इसको कोई काम करते हुए नहीं देखा है। पर इसे ये दोनों तोते बॉस कह कर बुलाते हैं!”

शुक्रवार, 4 मार्च 2011

जेल में रामलीला

रात में जेल में रामलीला का मंचन किया गया।

सुबह जेल के हवलदार और जेलर में संवाद --

“सर! कल रात क़ैदियों ने जेल में रामलीला की थी।”

“वाह! बहुत अच्छी बात है यह तो! पर तुम परेशान से क्यों दिख रहे हो?”

“सर .. परेशान होने वाली ही बात है सर! हनुमान बना क़ैदी अभी तक संजीवनी ले कर वापस नहीं आया है।”

गुरुवार, 3 मार्च 2011

फुलमतिया जी का प्रश्न, खदेरन का जवाब

फुलमतिया जी यदा-कदा खदेरन के ज्ञान का टेस्ट लेती रहती हैं। उस दिन भी उनको एक प्रश्न सूझ गया तो इठलाती हुए उन्होंने पूछ ही दिया, “ऐ जी!”

“ओ जी!!” खदेरन ने कहा।

फुलमतिया जी ने पूछा, “सम्मोहन किसे कहते हैं?”

खदेरन ने अपना सर खुजाया, बहुत कोशिश की पर इसका उत्तर उसे नहीं पता था, तो नहीं पता था। बोला, “नहीं मालूम।”

फुलमतिया जी ने विजेता वाले गर्व से कहा, “किसी आदमी को अपने प्रभाव से वश में करके उससे अपना मनचाहा काम करा लेने को सम्मोहन कहते हैं।”

सुन कर खदेरन ने अपनी खींसे निपोरी और बोला, “धत्त! उसे तो शादी कहते हैं!!”