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शनिवार, 14 अप्रैल 2012

खुशी की क़ीमत

क्लास में गणिट का टेस्ट लेने के बाद परिणाम बताया जा रहा था। भगावन की क्लास टीचर मिस गुनगुनिया ने भगावन को पास बुलाया और बोली, “इस बार गणित में तुम्हें 50 नंबर देते हुए मुझे खुशी हुई।”

भगावन ने कहा, “मैम, यहां भी आपने अपना घाटा कर लिया।”

मिस गुनगुनिया ने पूछा, “घाटा, वो कैसे?”

भगावन ने कहा, “आप अगर 100 नंबर देतीं, तो आपको दोगुनी खुशी होती ..।”

शुक्रवार, 13 अप्रैल 2012

जलवा मूछों का

एक दिन खदेरन का बेटा भगावन फाटक बाबू से पूछ बैठा, “अंकल आपके सिर के बाल सफेद और मूछें बिल्कुल काली हैं, ऐसा क्यों?”

फाटक बाबू ने जवाब दिया, “बेटा मेरी मूछें सिर के बालों से 15-20 साल छोटी हैं ना, इसलिए।”

रविवार, 1 अप्रैल 2012

समझौता

एक दिन फाटक बाबू और खदेरन गार्डेन में टहल रहे थे। आपस में घर परिवार की बातें हो रही थी।

फाटक बाबू ने खदेरन से पूछा, “खदेरन बरतन कितना भी संभाल कर रखो आपस में टकरा तो जाते ही हैं।”

खदेरन ने सहमति जताई, “ठीके कहते हैं फाटक बाबू।”

फाटक बाबू ने सिर हिलाते हुए कहा, “हम्म! मतलब तुम्हारा भी फुलमतिया जी के साथ .. ?”

फाटक बाबू बात पूरी करते उसके पहले ही खदेरन बोल पड़ा, “हां फाटक बाबू !”

फाटक बाबू ने पूछा, “आच्छा खदेरन यह बताओ कि जब फुलमतिया जी से तुम्हारी लड़ाई हो जाती है, तो तुम क्या करते हो?”

खदेरन ने बताया, “फाटक बाबू! हम हमेशा समझौता कर लेते हैं।”

फाटक बाबू ने फिर पूछा, “कैसे?”

खदेरन ने बताया, “ऊ का है न फाटक बाबू, …  मैं अपनी ग़लती मान लेता हूं, और फुलमतिया जी मेरी बातों से सहमत हो जाती हैं।”