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शनिवार, 22 जनवरी 2011

दान

एक दिन भगावन साधुओं की टोली में पहुंच गया। साधु ध्यानमग्न बैठे थे। वह कुछ बोलता उससे पहले  एक साधु की नज़र उस पर पड़ी, तो उसने पूछा, “क्या है बच्चा, क्यों आए हो?”

भगावन बोला, “मैं साधु बनना चाहता हूं।”images (17)

उस साधु ने पूछा, “ऐसा क्या हुआ जो तुम इस उम्र में साधु बनने की ठान बैठे हो।”

भगावन बोला, “मेरे पिताजी ने कहा है कि वे मुझ नालायक़ को अपनी संपत्ति में से फूटी कौड़ी भी नहीं देंगे, अपनी सारी संपत्ति साधुओं को दान कर देंगे।”

शुक्रवार, 21 जनवरी 2011

आज गले लगो दिवस है!

हर साल 21 जनवरी को अमरीका में ‘नेशनल हगिंग डे’ मनाया जाता है। मिलने-जुलने व गले लगने के इस दिन की शुरुआत 25 साल पहले हुई थी।

इस दिन के उपलक्ष्य पर फुलमतिया जी ने खदेरन से एक प्रश्न पूछ दिया।

“आरेन्ज्ड मैरिज और लव मैरिज में क्या अंतर है?”

खदेरन ने बहुत सोच विचार कर जवाब दिया,

“अरेन्ज्ड मैरिज – जब आप कहीं से, किसी पथ से गुज़र रहे होते हैं, और दुर्भाग्यवश कोई सांप आपको काट लेता है।

लव मरिज – यह तो किसी सांप के सामने नाचने के समान है! और वह भी यह गाते हुए कि ‘काटले! काटले!! काटले!!!”

अब आप बताइए कि क्या खदेरन के घर में इस गले लगो दिवस पर क्या हुआ होगा?

गुरुवार, 20 जनवरी 2011

फाटक बाबू का सपना

फाटक बाबू ने सपना देखा। देश के वो बहुत धनवान व्यक्ति हो गए हैं। उनका महलनुमा विशाल आवास है। खदेरन उनका मुख्य सेवक है। महल के सामने बड़ा सा लॉन है। उस प्रांगण में तीन स्वीमिंग पूल हैं। दो में पानी भरा है, तीसरा ख़ाली है।

खदेरन पूछता है, “फाटक महाराज! ये तीन-तीन स्वीमिंग पूल आपने बनवा लिया, चलिए ठीक है! पर इसमें से एक में आपने ठंडा पानी डलवाया, दूसरे में गर्म पानी डलवाया और तीसरे को ख़ाली रखा। इसका क्या मतलब है?”

फाटक बाबू ने समझाया, “खदेरन! ठंडा वाला स्वीमिंग पूल गर्मी में प्रयोग करने के लिए, गर्म पानी वाला जाड़े में प्रयोग करने के लिए और … तीसरा ख़ाली वाला …. खदेरन! …. कभी-कभी नहाने का दिल नहीं करता ना …. इसलिए!!”

शनिवार, 15 जनवरी 2011

उत्तम उपहार!!

खंजन देवी ने फोन खटकाया

और अपनी परेशानी डॉक्टर को बताया।

“आपसे एक निवेदन है

मेरी परेशानी का निदान करें,

वजन घटाना है,

ज़रा जल्दी से उसका समाधान करें।

इस नए वर्ष पर मेरे पति फाटक बाबू ने

एक उत्तम उपहार दिया तो सही

पर समस्या यह है कि मैं

उसमें घुस नहीं पा रही।”

 

समस्या सुनकर डॉक्टर ने कहा,

“कल आप यहां आ जाएं

और आकर अपनी समस्या के

ईलाज का नुस्ख़ा ले जाएं।

मेरा दावा है इसके प्रयोग करते ही

आप अपना वजन कमा सकेंगी

और पति के द्वारा दिए गए ड्रेस में

आसानी से समा सकेंगी।”

 

सुनकर डॉक्टर की बात

खंजन देवी ने फ़रमाया,

“कमाल है, ड्रेस की बात

आपके मन में कैसे समाया।

आप जो सोच रहे हैं

वह फ़ालतू है, निराधार है!

जिसमें मैं समा नहीं पा रही,

वह तो नई, चमचमाती कार है!!”

शुक्रवार, 14 जनवरी 2011

मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं!!

फुलमतिया जी इन दिनों कुकरी क्लास ज्वायन कर लीं हैं और उनके प्रयोग का केन्द्र बन गया खदेरन। देखते-देखते संक्रांति आ गया। हालाकि यह लाई, तिलवा के अलावा चूरा-दही और खिचड़ी खाने का दिन होता है, पर खदेरन तो खदेरन है। पूछ बैठा, “आज खाने में क्या बनाएंगी?”

फुलमतिया जी: जो आप कहो!

खदेरन : दाल चावल बना लीजिए।

फुलमतिया जी : अभी कल ही तो खिलाई थी।

खदेरन : तो सब्जी रोटी बना लीजिए।

फुलमतिया जी : बच्चे नहीं खाएंगे।

खदेरन : तो छोले पूड़ी बना लीजिए।

फुलमतिया जी : मुझे हेवी-हेवी लगता है। 

खदेरन : एग-भुर्जी बना लीजिए।

फुलमतिया जी : आज संक्रांति है, नॉन-वेज नहीं बनेगा। 

खदेरन : पराठे?

फुलमतिया जी : आज के दिन पराठे कौन खाता है?

खदेरन : होटल से मंगवा लेते हैं?

फुलमतिया जी : आज के दिन होटल का नहीं खाना चाहिए।

खदेरन : कढी-चावल?

फुलमतिया जी : दही नहीं है।

खदेरन : इडली-सांभर?

फुलमतिया जी : उसमें समय लगेगा, पहले बोलना चाहिए था ना।

खदेरन : मैगी ही बना लीजिए, उसमें समय नहीं लगेगा।

फुलमतिया जी : वो कोई मील थोड़े है? पेट नहीं भरता।

खदेरन : फिर अब क्या बनाएंगी?

फुलमतिया जी : वो, जो आप कहो!!!

शुक्रवार, 7 जनवरी 2011

अंतर

खदेरन का बेटा भगावन स्कूल में व्याकरण की क्लास में था। शिक्षक ने व्याकरण के नियम समझाने के बाद प्रश्न पूछा, “अच्छा ये बताओ कि स्वर और व्यंजन में क्या अंतर होता है?”

किसी के बोलने के पहले भगावन ने समझाया, ‘सर जी! स्वर मुंह से बाहर की ओर निकलता है और व्यंजन बाहर से मुंह के अंदर जाता है।”

रविवार, 2 जनवरी 2011

मैसेज

बात उस रात की है जिस दिन खदेरन-फुलमतिया दम्पत्ति पहली बार मोबाइल फोन खरीद कर लाए थे।

नए फोन के घर में आने, और उससे फोन-वोन, गाना-वाना आदि के इनिशियल एक्साइटमेंट (शुरुआती उत्साह) के बाद दोनों सोने गए।

दोनों में से किसी ने सपना देखा, अब ये सपना ही तो हो सकता है, क्योंकि इतना बोलने का साहस और खदेरन से और ऐसे वार्तालाप की उम्मीद उनके घर में  …..

फुलमतिया जी खदेरन के कंधे पर हाथ डाल कर बड़े प्यार  से, “खदेरू डार्लिंग! कितना अच्छा होता कि तुम मैसेज होते, और … मैं तुम्हें सेव करके रखती …. और जब चाहे … तब पढती!!”

खदेरन इठलाते, शर्माते, सकुचाते, फुलमतिया जी से, “फुल्लू जान! केवल सेव करके ही रखती, … ऊं, .. .. या, किसी सहेली को भी फॉरवार्ड करती!”