फुलमतिया जी इन दिनों कुकरी क्लास ज्वायन कर लीं हैं और उनके प्रयोग का केन्द्र बन गया खदेरन। देखते-देखते संक्रांति आ गया। हालाकि यह लाई, तिलवा के अलावा चूरा-दही और खिचड़ी खाने का दिन होता है, पर खदेरन तो खदेरन है। पूछ बैठा, “आज खाने में क्या बनाएंगी?”
फुलमतिया जी: जो आप कहो!
खदेरन : दाल चावल बना लीजिए।
फुलमतिया जी : अभी कल ही तो खिलाई थी।
खदेरन : तो सब्जी रोटी बना लीजिए।
फुलमतिया जी : बच्चे नहीं खाएंगे।
खदेरन : तो छोले पूड़ी बना लीजिए।
फुलमतिया जी : मुझे हेवी-हेवी लगता है।
खदेरन : एग-भुर्जी बना लीजिए।
फुलमतिया जी : आज संक्रांति है, नॉन-वेज नहीं बनेगा।
खदेरन : पराठे?
फुलमतिया जी : आज के दिन पराठे कौन खाता है?
खदेरन : होटल से मंगवा लेते हैं?
फुलमतिया जी : आज के दिन होटल का नहीं खाना चाहिए।
खदेरन : कढी-चावल?
फुलमतिया जी : दही नहीं है।
खदेरन : इडली-सांभर?
फुलमतिया जी : उसमें समय लगेगा, पहले बोलना चाहिए था ना।
खदेरन : मैगी ही बना लीजिए, उसमें समय नहीं लगेगा।
फुलमतिया जी : वो कोई मील थोड़े है? पेट नहीं भरता।
खदेरन : फिर अब क्या बनाएंगी?
फुलमतिया जी : वो, जो आप कहो!!!