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सोमवार, 9 मई 2011

शोले के रिमेक का मुहूरत

शोले का रिमेक बनाया जा रहा है। उसके निर्देशक जॉनी लीवर हैं।

अभी मुहूरत की शूटिंग है।

गब्बर बने हैं राजपाल यादव।

ठाकुर का रोल मिला है नाना पाटेकर को।

डायरेक्टर (जॉनी) ने राजपाल को समझाया। बहुत बार समझाने से उसे समझ में आया।

राजपाल बोला ‘‘सब सम… समझ गया।”

नाना को समझाया। नाना बोला, “मुझे मत समझा। इस ठिंगू को ही समझा। मैं सब जानता हूं। तू अपने काम से मतलब रख।”

जॉनी ने ‘लाइट, कैमरा, एक्शन कहा … फ़िल्म रॉल हुई और शूटिंग शुरु।

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कई बार के रिटेक पर राजपाल इतना बोल पाया …

गब्बर (राजपाल)—“ये हाथ मुझे दे-दे ठाकुर!”

(पहले से ही झुंझलाए नाना) ठाकुर : ले-ले, मेरे भी ले-ले, कालिया के भी ले-ले, बासन्ती के भी ले-ले,  जी न भरे तो जय और वीरू के भी ले-ले, एक से तो काम चलेगा नहीं तेरा दस-दस ले-ले और बन जा दस हाथों वाला राक्षस।

रविवार, 8 मई 2011

… मारा गया!

हास्यफुहार-401

ओ…मा मारा गया!

समाचार वाचन के समय बैकग्राउंड में ऑपरेशन का विडियो चल रहा था। जब यह समाचार “ओ…मा मारा गया!” सुनाया जा रहा था तो  बीच वाले अक्षर के वाचन के समय बैक ग्राउंड में गोली चलने से सुनाई नहीं दिया कि बीच का अक्षर क्या है?

आगे का समाचार था .. “वहां से एक दस्तावेज़ हाथ लगा है, जिस पर कुछ कोड लिखे हैं और हमारे खुफ़िया तंत्र ने उसके फ़ुल्ल फ़ॉर्म ढ़ूंढ़ निकाले हैं। वे ये हैं …

JEE – जेहादिक इंट्रेंस एक्ज़ामिनेशन (द्वारा सीखिए) MBA – मास्टर ऑफ बौम्बिंग एड्मिनिस्ट्रेशन
IIT – इंटरनेशनल इन्स्टीच्यूट ऑफ टेरोरिज़्म (दे रहा है डिग्री) M Tech – मास्टर्स इन टेरर टेक्नॉलॉजी
IIM – इंस्टीच्यूट ऑफ इनफ़िल्ट्रेशन मैनेजमेंट (की विशेष उपलब्धि) IAS – इराक़ आफ़्टर सद्दाम
CAT – कैरियर इन अल-क़ायदा एंड तालिबान (से हासिल कीजिए) MBBS – मास्टर ऑफ बौम्ब स्ट्रेटेजिज़
GATE – जेनरल ऐप्टीट्यूड इन टेरर एंड एक्स्ट्रीमिज़्म (का मुख्य पाठ्यक्रम) BDMS – बौम्ब धमाका एट मास स्केल
TOEFL – टेस्ट ऑफ एक्स्ट्रीमिस्ट फॉरेन लैन्गुएजेज़ (से बनिए) GRE – ग्रैजुएट इन रिलोकेशन एक्स्ट्रीमिज़्म


शनिवार, 7 मई 2011

गब्बर सिंह

चार सौवां हास्यफुहार!!

बात आज से सौ साल बाद की है।

स्कूल के सिलेबस में गब्बर सिंह की पढ़ाई होने लगी।

कक्षा के शिक्षक ने बात को इंटरेस्टिंग बनाने के लिए कहाना शुरु किया … “आज हम चर्चा करेंगे महान आत्मा महाशय गब्बर सिंह के जन्म की। जब वे इस दुनियां में पधारे अर्थात जब उनका जन्म हुआ तो वे रो नही रहे थे, हंस रहे थे … ऐसे हे हे हे हे ….”

सारा क्लास ‘हे-हे-हे-हे’ कर हंसने लगा!

शिक्षक आगे बोला, “फिर गब्बर सिंह के मुंह से कुछ शब्द निकले। इसे सुनते ही उनकी माता जी ने उन्हें ज़ोर से थप्पड़ मारा ….”

क्लास में सन्नाटा!

शिक्षक का प्रश्न, ‘‘कोई बता सकता है मां ने थप्पड़ क्यों मारा?”

किसी ने कोई जवाब नहीं दिया तो शिक्षक ने बताया, “गब्बर सिंह ने जन्म लेते ही मां से पूछा था ‘कितने आदमी थे?’

शुक्रवार, 6 मई 2011

शादी

फाटक बाबू और खदेरन मॉर्निन्ग वाक पर थे। एक जोड़ा सामने से गुज़रा। खदेरन ने उन्हें देखा। उसके मन में एक ख़्याल आया। वह फाटक बाबू से बोला,“फाटक बाबू! जब भी मैं ऐसा कोई जोड़ा देखता हूं तो मेरे मन में एक प्रश्न बार-बार आता है।”

फाटक बाबू ने पूछा, “कैसा जोड़ा?”

खदेरन ने बताया, “वो देखिए न सामने। मियां सिक्सटीज़ में, बीवी टीन्स!”

‘‘अरे खदेरन!” फाटक बाबू ने खदेरन को समझाया, “कुछ तो खूबी देख कर ही चुनती होंगी न”

“मुझे तो कोई कारण समझ में नहीं आता। इतनी खूबसूरत, शोडषी क्यों बुड्ढे से शादी कर लेती है। आप को अगर कोई दो कारण भी मालूम हो तो बताइए।” खदेरन ने चैलेंज दे दिया।

फाटक बाबू बोले, “वेरी सिम्पल! एक तो ‘इनकम’ और दूसरा ‘दिन कम’!”

गुरुवार, 5 मई 2011

भोजन

वहां स्वस्थ्य की चर्चा चल रही थी।

खदेरन भी उपस्थित था।

सभा के संचालनकर्ता ने पूछा, “वह कौन सा भोजन है जो खाने के वर्षों बाद भी हमारा पीछा नहीं छोड़ता, हमें दुख-तकलीफ़ ही देता है?”

सारे सभागार में एक चुप्पी छा गई।

खदेरन ने चुप्पी तोड़ी। बोला, “'Wedding Cake'....”!!!

सोमवार, 2 मई 2011

अगले जनम मोहे तिलचट्टा कीजौ

फाटक बाबू और खदेरन एक संत का व्याख्यान सुन कर घर लौट रहे थे। रास्ते में उस सभा में दिए गए आख्यान और उपदेश, जो उनके दिमाग पर अब भी छाया हुआ था, की चर्चा भी वे आपसे में करते जा रहे थे। संत महोदय ने मनुष्य के कर्म और अगले जन्म से संबंधित विषय पर बहुत ही रोचक बातें बताई थी।

फाटक बाबू ने खदेरन से पूछ दिया, “खदेरन! तुम अगले जन्म में क्या बनना पसन्द करोगे?”

खदेरन ने जवाब दिया, “फाटक बाबू! मैं तो कौकरॉच बनना चाहूंगा।”

फाटक बाबू को खदेरन के जवाब से आश्चर्य हुआ। उन्होंने पूछा, “क्यों?”

खदेरन ने बताया, “फाटक बाबू, मेरी पत्नी फुलमतिया जी सिर्फ़ कौकरॉच से ही डरती है!”

रविवार, 1 मई 2011

आज मज़दूर दिवस है

इस चित्र को देखें। कुछ मन में आए तो कहें ….

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एक शीर्षक हमारी तरफ़ से …

सो जाते हैं फुटपाथ पर अख़बार बिछाकर

मजदूर  कभी  नींद  की  गोली  नहीं खाते!