फ़ॉलोअर

सोमवार, 31 मई 2010

साफ-सफाई

उस दिन बौस राउंड पर थे। खासकर साफ-सफाई का मुआयना कर रहे थे। अनुभाग के सरे कर्मचारियों को एकत्रित किया और पूछे, “बताइए क्या आपने दफ्तर में घुसने के पहले अपने गंदे पैरों को मैट पर साफ किया था। हमें साफ-सफाई का पूरा ख्याल रखना चाहिए। ”

सारे कर्मचारी एक स्वर में बोले, “जी हां सर। हमने मैट पर अपने पैरों को साफ किया था।”

बॉस ने खुलासा किया, “हमें सच का भी ख्याल रखना चाहिए ऑफिस के दरवाजे पर कोई मैट नहीं है।”




अगर पसंद आया तो दिल खोलकर ठहाका लगाइएगा।

शनिवार, 29 मई 2010

परिभाषा

परिभाषा

खामोशी

00660_splash_1024x768 बात-चीत की कला का रहस्य।

शुक्रवार, 28 मई 2010

सास-बहु


सास बहू के सीरियल देखकर कन्या बोली,

मां तुम चाहे जब उठवाना मेरी डोली !

चाहे तो शादी से पहले लड़का भी मत दिखाना,

लेकिन शादी से पहले एक बार,

बस एक बार सास से जरूर मिलवाना !!

****************************************************
अगर पसंद आया तो दिल खोलकर ठहाका लगाइएगा।
****************************************************

गुरुवार, 27 मई 2010

मोबाइल का सिम

मोबाइल का सिम

लड़का हांफते –कांपते मोबाइल की दुकान पर पहुंचता है। उसे बदहबास देख दुकानदार ने पूछा - “क्या हुआ, क्यों इतने परेशान हो ? ”

लड़का – “मेरी गाय मेरे मोबाइल का सिम खा गई है।”

दुकानदार – “तो इसमें मैं क्या करूँ ?”

लड़का – “गाय सिम खा कर भाग गई है और दो दिन से ढूंढे नहीं मिल रही है। मैंने पूरा इलाका छान मारा है। ”

दुकानदार – “तो मैं क्या करूँ ? ….”

लड़का - “मुझे डर है कहीं रोमिंग चार्ज तो नहीं पड़ रहा है।”

बुधवार, 26 मई 2010

कलियुगी द्रौपदी

मन व्याकुल हो रहा क्या होगा नाथ !
जुए में जब हारे पत्नी आई बेलन ले साथ !!
दुशासन बोला क्षमा करो हमको,
यह कलयुगी द्रौपदी हो मुबारक तुमको !
पत्नी बोली पीछा नहीं छोड़ूंगी भइए,
लौटाओ सब इनसे जीते हुए रुपइए !!
********************************************
अगर कलियुगी द्रौपदी पसंद आयी तो लगाइए ठहाका !
********************************************

मंगलवार, 25 मई 2010

सब्र करो, धीरज धरो

 

सब्र करो, धीरज धरो

आराम के दो पलबस की ज़ोर दार एक्सीडेंट हो गई।

एक आदमी रोते हुए बोल रहा था – “हे भगवान ….. मेरा हाथ टूट गया है।”

पास खड़ा आदमी बोला --- “सब्र करो, धीरज धरो – उस आदमी को देखो, वो मर चुका है, फिर भी चुपचाप है।”

सोमवार, 24 मई 2010

एक पुरानी कवित

उफ़..... ! आज आप से रु-ब-रु होने में देर हो गयी... ! कुछ उलझन थी... लेकिन अब आपके नजर कर रही हूँ होल्लर मोरादाबादी की एक मशहूर हास्य-कविता !
नेता भाषण देकर आया।
आ कर नौरकर पर गुर्राया।
मैं आया हूँ थका-थकाया।
पैर दबाओ, रामलुगाया !
रामलुगाया बोला, मालिक !
एक पते की बात बताऊँ ?
भाषण से तो गला थका है,
आप कहें तो गला दबाऊं !!
अगर पसंद आयी यह हास्य-कविता लगा दीजिये दिल खोलकर ठहाका... !