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सोमवार, 31 जनवरी 2011

एक रुपए का सवाल है!

एक भिखारी स्कूल जाते भगावन से, “एक रुपए का सवाल है।”

भगावन ने जवाब दिया, “पीछे सायकल पर गणित के टीचर आ रहे हैं। उन से पूछ लेना।”

रविवार, 30 जनवरी 2011

भगावन का प्रश्न

भगावन ने खदेरन से प्रश्न किया, “पापा, एक आदमी एक से अधिक शादी क्यों नहीं कर सकता?”

खदेरन ने जवाब दिया, “बेटा भगावन बड़े होकर ख़ुद समझ जाओगे कि जो अपनी रक्षा ख़ुद नहीं करते, उन्हें क़ानून बचाता है।”

शनिवार, 29 जनवरी 2011

खदेरन की फ़िज़ूलख़र्ची

images (21)फुलमतिया जी, आपको तो मालूम ही है, कल उनका व्रत पूरा हो गया न बोलने का।

अब समय आ गया था उनके मुंह खोलने का।

आज सुबह-सुबह उनके बोल फूटे, खदेरन पर फ़िज़ूलख़र्ची का आरोप लगाते हुए बोलीं, “तुम बहुत से पैसे बेकार में ख़र्च करते हो।”

खदेरन ने पूछा, “आप यह कैसे कह सकती हैं?”

फुलमतिया जी ने बताया, “तुमने वह आग बुझाने वाला यंत्र ख़रीदा था, वह अभी तक एक बार भी काम नहीं आया!”

शुक्रवार, 28 जनवरी 2011

उदास खदेरन!

खदेरन उस दिन बड़ा उदास था। बालकॉनी में बैठा आसमान की ओर ताके जा रहा था।

फाटक बाबू अपनी लॉन में चहलकदमी कर रहे थे। अचानक उनकी नज़र खदेरन पर पड़ी। खदेरन की उदासी उनसे छुप न सकी। वो उसके पास गए। पूछ बैठे, “खदेरन! बहुत उदास-उदास दिख रहे हो। क्या बात है?”

खदेरन ने कहा, “क्या बताऊं फाटक बाबू? फुलमतिया जी (पत्नी) से झगड़ा हो गया था। … और उन्होंने क़सम खाई थी कि वो पूरे एक महीने तक मुझसे बात नहीं करेंगी।”

फाटक बाबू बोले, “तो तुमको फुलमतिया जी का चुप रहना बुरा लग रहा है क्या?”

खदेरन ने बताया, “नहीं फाटक बाबू, यह बात नहीं है। बात यह है कि आज एक महीना पूरा हो रहा है!”

बुधवार, 26 जनवरी 2011

खदेरन और फुलमतिया जी की ड्राइविंग

गणतंत्र दिवस के दिन दफ़्तरों में छुट्टी होती है। सड़कें ख़ाली होती हैं। फुलमतिया जी ने खदेरन से कहा, “आज हमें लॉन्ग ड्राइव पर ले चलो।”    

खदेरन राज़ी हो गया। दोनों निकले। सड़कें ख़ाली थी। खदेरन बहुत तेज़ी से गाड़ी चला रहा था। सामने से कोई गाड़ी आती और खदेरन की गाड़ी उस गाड़ी के क़रीब से सर्र से निकलती तो फुलमतिया जी को डर लगता। उनसे रहा नहीं गया तो बोलीं, “जब तुम इतनी तेज़ कार चलाते हो और कोई गाड़ी क़रीब से गुज़रती है तो मुझे बहुत डर लगता है।”

खदेरन लापरवाही से बोला, “डरती क्यों हो? तुम भी मेरी तरह आंखें बंद कर लिया करो।”

मंगलवार, 25 जनवरी 2011

भगावन की समझदारी

उस दिन किसी कारण से भगावन स्कूल नहीं जा पया। तो उसकी मम्मी फुलमतिया जी ने कहा, “रिझावन के यहां जाकर आज पढाए गए सारे नोट्स ले आ, ता कि पता तो चले आज क्या पढाई हुई है?”

मम्मी का लाड़ला भगावन रिझावन के घर नोट्स लेने पहुंचा। काम करते-करते बहुत देर हो गई तो रिझावन बोला, “बहुत रात हो गई है। तू मेरे घर ही रुक जा।”

भगावन को यह प्रस्ताव पसंद आया। बोला, “ठीक है, मैं घर से अपना नाइटसूट लेकर आता हूं।”

सोमवार, 24 जनवरी 2011

ख़राब तबियत खदेरन की

खदेरन की तबियत ख़राब थी। फाटक बाबू को मालूम हुआ तो गए उसे देखने। पहुंचते ही फाटक बाबू ने पूछा, “अरे खदेरन! तू तो डॉक्टर के पास जाने वाला था, क्या हुआ?”

खदेरन धीमे और बीमार स्वर में बोला, “फाटक बाबू कल जाऊंगा दिखाने!”

फाटक बाबू को हैरानी हुई। पूछे, “क्यों?”

खदेरन ने बताया, “आज थोड़ी तबियत ख़राब है ना!”