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मंगलवार, 12 अप्रैल 2011

ब्रेक अप

तो यह मान लूं कि अब हमारे बीच कुछ नहीं रहा।”

“हां।”

“उफ़! मैं तुम्हें भुला नहीं सकता!!”

“यह तुम्हारा प्रोबलम है।”

“तुम मेरे सारे लव लेटर वापस कर दो!”

“ये टोकड़ी सामने पड़ी है। इसमें से जो तुम्हारे हों निकाल लो।”

“तुम्हें जो मैंने हीरे की अंगूठी पहनाई थी, वह दे दो। उसे देखे कर तुम्हें याद किया करूंगा।”

“तुम यह सोच कर मुझे याद करना कि मुझसे तुमने रिंग मांगी थी, लेकिन मैंने नहीं दी।”

शुक्रवार, 8 अप्रैल 2011

दुर्घटना

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इस चित्र को देख कर एक चुटकुला याद आ गया।

एक बार एक शराबी मोटर साइकिल से रात में घर जा रहा था। पर दुर्घटनावश ट्रक से टकड़ा हस्पताल पहुंच गया।

जब वह होश में आया तो अस्पताल के बिस्तर पर उसके एक मित्र ने पूछा, ‘‘क्या हुआ था?”

उसने बताया, “मैं मोटर साइकिल पर घर आ रहा था। तभी सामने से दो लाइट मेरी आंखों में पड़ी। दो मोटर साइकिल वाले सड़क के दोनों किनारे पर से आ रहे थे। मैंने सोचा कि इनके बीच से अपनी मोटर साइकिल निकाल लूं। और मैंने वैसा ही किया। पर दुर्घटना हो गई। मैं अभी तक समझ नहीं पाया कि उन दोनों ने बीच में रॉड क्यों बांध रखा था।”

(वह एक ट्रक से टकड़ाया था)

 

मंगलवार, 5 अप्रैल 2011

दो हजार रुपए

फुलमतिया जी जल्दबाज़ी में थीं। बाज़ार जाना था। उन्होंने सो रहे खदेरन से कहा, “मैं बाज़ार जा रही हूं, मुझे दो हजार रुपए की ज़रूरत है।”

खदेरन ने झल्लाए हुए कहा,“ तुम्हें रुपए से ज़्यादा अक्ल की ज़रूरत है।”

फुलमतिया जी ने कहा, “हां, वो तो है। लेकिन मैंने तुमसे वही चीज़ मांगी है जो तुम्हारे पास है।”

सोमवार, 4 अप्रैल 2011

इस चित्र का शीर्षक क्या हो?

गिलहरी

मेरा शीर्षक है ::

सागर पर पुल बनबाया

लंका को फ़तह कराया

क्या था वह ठट्टा हस्सी

अब मुझको चखने दे लस्सी!!

ख़्वाहिश

कक्षा में टीचर चेतावन सिंह ने कहा, “बच्चों अगर मन से प्रार्थना करें तो भगवान आपकी ख़्वाहिश ज़रूर पूरी करेगा।

भगावन ने तुरत कहा, “ये झूठ है सर! … अगर यह सच होता, तो अब तक आपका तबादला दूसरे स्कूल में हो गया होता।”

रविवार, 3 अप्रैल 2011

खदेरन का सपना

खदेरन फूलमतिया को रात देखे गए सपने की बात बता रहा था, "फुलमतिया जी! आपको पता है, रात हमरे सपने में भगवान आये थे!"

फुलमतिया जी ने कहा, "आ रे जा रे दाढ़ीजार ! अभी तक रात की उतरी नहीं है!! जिसके सपने में शैतान न आये उसके सपने में भला भगवान आते हैं...?"

खदेरन ने कहा, "हाँ सच्ची-सच्ची !"

फुलमतिया जी ने पूछा, "अच्छा तो क्या कहा भगवान ने ?"

खदेरन ने बताया, "भगवान बहुत प्रसन्न थे. बोले, "बेटा खदेरन ! चलो फटाफट एक मन्नत मांग लो!"

फुलमतिया, "तो तुमने क्या माँगा ?"

खदेरन बोला, "हम बोले भगवानजी ! अगर आप इतना ही प्रसन्न हैं तो मुझे शादी से पहले के दिन लौटा दीजिये!"

फुलमतिया, "मार मुँहझौंसा ! कौनो अच्छा चीज मांगते! खैर ई बाताओ कि फिर का हुआ ?"

खदेरन ने बताया, " होगा का... ! भगवानो को हंसी आ गयी. बोले बेटा खदेरन ! मैंने तुम्हे 'मन्नत' मांगने को कहा था 'जन्नत' नहीं."

शनिवार, 2 अप्रैल 2011

कुत्ते की शादी

फुलमतिया जी ने शंका समाधान के लिए खदेरन को गुहार लगाई, "हमको ई बात समझ में नहीं आयी कि आखिर कुत्तों की शादी क्यों नहीं होती ?"

खदेरन ने समझाया, "लो कर लो बात ! अरे समझने के लिए समझदारी चाहिए। उ तो पहिले से ही कुत्ते की जिन्दगी जी रहा है। अब शादी करके क्या करेगा.... ?"