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गुरुवार, 24 जून 2010

आना जरूर

वाकया खदेरन की शादी के समय का है।

खदेरन की शादी में फाटक बाबू शामिल नहीं हुए थे। तो खदेरन ने उनसे हुई अगली मुलाकात पर अपनी शिकायत दर्ज की – “फाटक बाबू – आप मेरी शादी में नहीं आए।”

फाटक बाबू ने कहा, “- पर तुमने तो मुझे बताया ही नहीं कि तुम्‍हारी शादी कब हो रही है?”

खदेरन बोला, – “क्‍या कहते हैं फाटक बाबू। चिट्ठी लिखा तो था।”

फाटक बाबू ने कहा, “पर मुझे तो कोई चिट्ठी मिली ही नहीं।”

खदेरन बो;, “फाटक बाबू। ये भी कोई बात हुई चिट्ठी में मैंने लिखा तो था कि चाहे मेरा पत्र आपको मिले या न मिले, आप मेरी शादी में आना जरूर।”

अगर पसंद आया तो दिल खोलकर ठहाका लगाइएगा।

5 टिप्‍पणियां:

  1. मजेदार लगा ।

    खदेरन और फाटक जी तो ’लोहा सिंह ’ नाटक के किरदार हैं .क्या ये किताब उपलब्ध हो सकती है ?

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  2. हा हा हा हा ………चिट्ठी मिले या न मिले…………

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  3. लतीफा इतना अच्छा है कि ताऊ का गधा
    इसको सुनकर अब तक हँस रहा है!
    --
    यकीन न हो तो ताऊ के ब्लॉग पर देख लीजिए!

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