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रविवार, 22 नवंबर 2009

नोंक-झोंक-2

अगर पसंद आया तो दिल खोलकर ठहाका लगाइएगा।


नोंक-झोंक-2

नोंक-झोंक थोड़ी तीखी हो गई। गुस्से से श्रीमान ने श्रीमती जी को एक जोरदार तमाचा जड़ दिया। श्रीमती जी की आंखों से आसुओं का सैलाब फूट पड़ा। उनका रोते-रोते बुरा हाल हो गया। यह देख श्रीमान को दया आ गई। श्रीमान ने श्रीमती जी से बड़े प्यार से कहा, “प्रिये, लोग हाथ उसी पर उठता है, जिसे वह बेइंतहा प्यार करते हैं।”


यह सुनते ही श्रीमती जी ने आंसू पोछ लिए। श्रीमान जी के पास आईं। बड़े उत्साह से उनके गालों पर दो तमाचे जड़ दिए। और उतने ही प्यार से बोलीं, “आप क्या समझते हैं, कि मैं आपको कम प्यार करती हूं। जी मैं तो आपको आपसे दुगुना प्यार करती हूं।”

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अगर पसंद आया तो ठहाके लगाइएगा
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शनिवार, 21 नवंबर 2009

फाटक बाबू-2

फाटक बाबू-2



उस दिन फाटक बाबू अदालत में हाजिर थे। सरकाहरी गवाह बनकर। बचाव पक्ष के वकील ने उनसे प्रश्न पूछा।


वे लगे विस्तार से जवाब देने। वकील ने उनसे काहा, “आप सिर्फ हां या ना में जवाब दीजिए। इतना डिटेल में मत समझाइए। ”

इस पर फाटक बाबू बोले - “हर प्रश्न का उत्तर हां या ना में नहीं हो सकता। ”

यह सुन सरकारी वकील रूष्ट हो गए। बोले - “आप ऐसा कैसे कह सकते हैं ? क्यों नहीं हो सकता है ?”

तो फाटक बाबू ने चैलेंज किया, “क्या आप मेरे प्रश्न का उत्तर हां या ना में दे सकते हैं?”

वकील साहब ने चैलेंज स्वीकार किया, “बिल्कुल दे सकता हूँ।”

फाटक बाबू ने पूछा, “तो बताइए, क्या आप आज भी अपनी पत्नी से पिट कर आ रहें हैं ?”

वकील साहब क्या उत्तर दें – हां या नहीं .....................

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अगर पसंद आया तो ठहाके लगाइएगा
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शुक्रवार, 20 नवंबर 2009

फाटक बाबू-1


एक पार्टी में एक अमेरिकन फाटक बाबू से, "आप की कमीज़ पर कॉफी गिर गई है, साफ कर लीजिए।"

फाटक बाबू, "तुम अमेरिकन हमेशा दूसरों के फटे में टांग अड़ाने से बाज़ नहीं आओंगे। तुम्हारी सिगरेट से तुम्हारा कोट जल रहा है पर मैंने तो कुछ नहीं कहा।"

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अगर पसंद आया तो दिल खोलकर ठहाका लगाइएगा।
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गुरुवार, 19 नवंबर 2009

नोंक-झोंक-1

खाना देखकर श्रीमान जी ने मुंह बिचका दिया और कहा, “फिर वही बैगन की सब्जी। तुम्हें शायद मालूम नहीं कि ज़्यादा बैगन खाने से आदमी अगले जन्म में गधा बनता है।”

श्रीमतीजी बोलीं, "जो बनाती हूँ चुपचाप खा लिया करो। यह बात तो तुम्हें पिछले जनम में सोचनी चाहिए थी।"

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अगर पसंद आया तो दिल खोलकर ठहाका लगाइएगा। *************************************************************

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बुधवार, 18 नवंबर 2009

परिभाषा-1


पड़ोसी :
वह महानुभाव
जो आपके मामले को आपसे ज़्यादा समझता हो।

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अगर पसंद आया तो दिल खोलकर ठहाका लगाइएगा।

मंगलवार, 17 नवंबर 2009

चौके-छक्के – 1

मित्रों,

ब्लॉग की दुनियां में मैं भी आ गई। सिर्फ एक उद्देश्य से कि लोगों के तनाव भरे जीवन में एक-आध पल हंसी के बांट सकूं। इसके लिए जो भी मैं पेश करूंगी वे मेरे स्व रचित हों इसका दावा मैं नहीं कर सकती। मुझे जहां से भी हास्यफुहार मिलेगा, मैं पेश करती रहूंगी।

चौके-छक्के – 1

मियां-बीवी लौट रहे थे होटल से खाकर खाना,

तबियत बड़ी रंगीन थी मौसम भी था सुहाना।

हस्बैंड मचल रहा था सुनने को फिल्मी गाना।

बीवी ने हाथों में हाथें डालकर छेड़ा था ये तराना -- के

....... “भैया मोरे राखी के बंधन को निभाना

भैया मोरे छोटी बहन को न भुलाना”

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अगर पसंद आया तो दिल खोलकर ठहाका लगाइएगा।

सोमवार, 16 नवंबर 2009

चौके-छक्के – 1



मित्रों,
ब्लॉग की दुनियां में मैं भी आ गई। सिर्फ एक उद्देश्य से कि लोगों के तनाव भरे जीवन में एक-आध पल हंसी के बांट सकूं। इसके लिए जो भी मैं पेश करूंगी वे मेरे स्व रचित हों इसका दावा मैं नहीं कर सकती। मुझे जहां से भी हास्यफुहार मिलेगा, मैं पेश करती रहूंगी।
आज मेरे बड़े बेटे अभिषेक का जन्म दिन है। सुबह से ही इस उधेर-बुन में थी कि उसे क्या तोहफा दूं। “हास्यफुहार” के रूप मे ब्लॉग का तोहफा उसे ज़रूर पसंद आएगा। तो आप नीचे के आज के हास्यफुहार का आनंद लीजिए, मैं उसे फोन लगाती हूं।
हां अगर पसंद आया तो दिल खोलकर ठहाका लगाना नहीं भूलिएगा।

चौके-छक्के – 1

मियां-बीवी लौट रहे थे
होटल से खाकर खाना,
तबियत बड़ी रंगीन थी
मौसम भी था सुहाना।
हस्बैंड मचल रहा था
सुनने को फिल्मी गाना।
बीवी ने हाथों में हाथें
डालकर छेड़ा था ये तराना --
के .......
“भैया मोरे राखी के बंधन को निभाना
भैया मोरे छोटी बहन को न भुलाना”
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