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शुक्रवार, 11 मार्च 2011

खेलावन को प्रेम हो गया। पर उसे साहस नहीं हो रहा था अपने प्रेम का इज़हार करने का। दोस्तों के समझाने बुझाने पर किसी तरह उसने एक दिन कह ही दिया, “I Love you !”

लड़की ने झिडकते हुए कहा, “तमीज़ से बात करो।”

खेलावन ने जवाब दिया, “With due respect I beg to say that  I Love you"

बुधवार, 9 मार्च 2011

तलाक

वकील, ‘तलाक करवाने के पांच हजार रुपए लगेंगे।’

मुवक्किल, ‘कैसी बात कर रहे हैं वकील साहब, पंडित जी ने शादी तो 51 रुपए में करवा दी थी!’

वकील, ‘सस्ते काम का नतीजा देख लिया न?’

मंगलवार, 8 मार्च 2011

भविष्यफल

 

एक आदमी ज्योतिषी से: मेरी शादी क्यूँ नहीं हो रही है....?

ज्योतिषी : कैसे  होगी ? कुंडली में सुख ही सुख लिखा है....!

रविवार, 6 मार्च 2011

सज़ा मिलेगी

आपको तो याद होगा, पिछले दिनों की बात। पहली बार खदेरन ने फुलमतिया जी को जवाब दे दिया था। याद ताज़ा करने के लिए यहां क्लिक करें।

फुलमतिया जी के प्रश्न का खदेरन ने जवाब दे दिया,

और जवाब क्या दिया, उसने तो उनकी बात भी काट दी।

इस पर तो फुलमतिया जी पूरी तरह भड़क गईं।

गुस्से से तमतमायी बीवी बोली

“आजकल बहुत बोलने लगे हो,

लगता है जैसे सोते से जगे हो

अब तुम तो क्या

आज तुम्हारी निंद भी जगेगी

इस धृष्टता की तुम्हें बरोबर सज़ा मिलेगी!images (26)

जो भी कहूं वो बिल्कुल ही नहीं जंचती है

मेरी बात तुमको सही नहीं लगती है।

अब तुम अपनी खैर मनाओगे

आज के बाद तुम मेरी आवाज़ नहीं सुन पाओगे।”

 

खदेरन ने बड़े भोलेपन से कहा,

“अहा!

गुस्से में भी लगती तुम निराली हो

आवाज़ नहीं सुन पाऊंगा तुम्हारा

क्या, तुम गूंगी होने  वाली हो?”

 

यह सुन जाता रहा संयम रहा-सहा

फुलमतिया जी ने त्योरी चढाते हुए कहा,

“हां-हां मेरा ढंग अजब और मैं निराली हूं

गूंगी मैं नहीं, तुम्हें बहरा करने वाली हूं।”

शनिवार, 5 मार्च 2011

तोता

खदेरन को फुलमतिया जी का आदेश हुआ, “बाज़ार से तोते खरीद कर ले आओ! मुझे तोते पालने हैं।”

हुक्म की तामील करते हुए खदेरन बाज़ार पहुंचा। वह पालतू पक्षियों की दुकान पर गया। दुकान में अन्य पंक्षियों के अलावा तीन तोते टंगे हुए थे। उसने दाम पूछा।

दुकानदार ने बताया, “ये पहला वाला 500 रुपये का, यह दूसरा वाला1000 रुपये का और यह तीसरा वाला 2000  रुपये का।”

खदेरन को आश्चर्य हुआ। बोला, “तोते बहुत महंगे हैं। उस पर से उनके अलग-अलग दाम क्यों रखा है?”

दुकानदार ने समझाया, “इस पहले वाले, लाल तोता का दाम 500 रुपये इसलिए है कि यह कंप्यूटर चलाना जानता है।”

“अच्छा, और इस दूसरे वाले का 1000 रुपये क्यों?”

“यह नीला तोता, यह बहुत समझदार है और  यह कंप्यूटर के अलावा ऑफिस का भी कई काम कर सकता है।”

 

“अच्छा!! और तीसरा वाला … इसका 2000  रुपये किसलिए? इसमें क्या खासियत है??”

“यह सफ़ेद तोता, सच कहूं तो, तो मैंने कभी इसको कोई काम करते हुए नहीं देखा है। पर इसे ये दोनों तोते बॉस कह कर बुलाते हैं!”

शुक्रवार, 4 मार्च 2011

जेल में रामलीला

रात में जेल में रामलीला का मंचन किया गया।

सुबह जेल के हवलदार और जेलर में संवाद --

“सर! कल रात क़ैदियों ने जेल में रामलीला की थी।”

“वाह! बहुत अच्छी बात है यह तो! पर तुम परेशान से क्यों दिख रहे हो?”

“सर .. परेशान होने वाली ही बात है सर! हनुमान बना क़ैदी अभी तक संजीवनी ले कर वापस नहीं आया है।”

गुरुवार, 3 मार्च 2011

फुलमतिया जी का प्रश्न, खदेरन का जवाब

फुलमतिया जी यदा-कदा खदेरन के ज्ञान का टेस्ट लेती रहती हैं। उस दिन भी उनको एक प्रश्न सूझ गया तो इठलाती हुए उन्होंने पूछ ही दिया, “ऐ जी!”

“ओ जी!!” खदेरन ने कहा।

फुलमतिया जी ने पूछा, “सम्मोहन किसे कहते हैं?”

खदेरन ने अपना सर खुजाया, बहुत कोशिश की पर इसका उत्तर उसे नहीं पता था, तो नहीं पता था। बोला, “नहीं मालूम।”

फुलमतिया जी ने विजेता वाले गर्व से कहा, “किसी आदमी को अपने प्रभाव से वश में करके उससे अपना मनचाहा काम करा लेने को सम्मोहन कहते हैं।”

सुन कर खदेरन ने अपनी खींसे निपोरी और बोला, “धत्त! उसे तो शादी कहते हैं!!”