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रविवार, 25 जुलाई 2010

मेहमान

हंसना ज़रूरी है, क्यूंकि …….


हंसने से ख़ून बढ़ता है।

मेहमान


फाटक बाबू उस दिन तफ़रीह के मूड में थे। पर सुबह-सुबह ही कॉल बेल बजी और जब दरवाज़ा खोला तो सामने देखा बिन बुलाए मेहमान हैं, वह भि स-परिवार। खंजन देवी के शहर से।

इस अचानक आए मुसीबतों (मेहमानों) का स्वागत करते हुए फाटक बाबू बोले, “आने से पहले फोन कर दिया होता।”

पधारे मेहमानों ने जवाब दिया, “अगर फोन कर देते, तो आप घर में कैसे मिलते!”


16 टिप्‍पणियां:

  1. लाख टके की बात कही भई। अगर घर पर नहीं मिलते तो कितना पैसा खर्च होता होटल में . है कि नहीं ......................हाहाहाहाहहाहा

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  2. हम भी यही आजमायेंगे. तभी कहूँ जिसे मै फोन करके जाता हूँ वो घर से बाहर क्यो होता है !!!!!!!!!!

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  3. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

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  4. हाँ आपको पहले से ही जानते थे, तभी फोन नहीं किया।

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  5. बड़े पहुंचे हुए होते है मेहमान! सब ताड़ लेते हैं।

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  6. अरे, मेहमान तो भगवान् होते है और भगवान् कभी बता का नहीं आते ! ........................अच्छा है !!!

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  7. वाह क्या बात है!!!!!!!!!!!!!!!!!!
    हा-हा-हा-हा...

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