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मेहमानफाटक बाबू उस दिन तफ़रीह के मूड में थे। पर सुबह-सुबह ही कॉल बेल बजी और जब दरवाज़ा खोला तो सामने देखा बिन बुलाए मेहमान हैं, वह भि स-परिवार। खंजन देवी के शहर से।इस अचानक आए मुसीबतों (मेहमानों) का स्वागत करते हुए फाटक बाबू बोले, “आने से पहले फोन कर दिया होता।” |
लाख टके की बात कही भई। अगर घर पर नहीं मिलते तो कितना पैसा खर्च होता होटल में . है कि नहीं ......................हाहाहाहाहहाहा
जवाब देंहटाएंहम भी यही आजमायेंगे. तभी कहूँ जिसे मै फोन करके जाता हूँ वो घर से बाहर क्यो होता है !!!!!!!!!!
जवाब देंहटाएंnice
जवाब देंहटाएंबहुत अच्छी प्रस्तुति।
जवाब देंहटाएंराजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।
हाँ आपको पहले से ही जानते थे, तभी फोन नहीं किया।
जवाब देंहटाएंमज़ेदार!
जवाब देंहटाएंहा-हा-हा......
ha ha..
जवाब देंहटाएंबड़े पहुंचे हुए होते है मेहमान! सब ताड़ लेते हैं।
जवाब देंहटाएंमज़ा आ गया बधाई
जवाब देंहटाएंअरे, मेहमान तो भगवान् होते है और भगवान् कभी बता का नहीं आते ! ........................अच्छा है !!!
जवाब देंहटाएंवाह क्या बात है!
जवाब देंहटाएंहा-हा-हा-हा...
मज़ा आ गया !
जवाब देंहटाएंमज़ेदार!
जवाब देंहटाएंहा-हा-हा......
वाह क्या बात है!!!!!!!!!!!!!!!!!!
जवाब देंहटाएंहा-हा-हा-हा...
आनन्ददायक ।
जवाब देंहटाएंहा हा हा जबरदस्त..
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