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शनिवार, 30 अप्रैल 2011

थर्मामीटर

खदेरन डॉक्टर उठावन सिंह की क्लीनिक  पहुंचा। उसे तेज़ बुखार था। डॉक्टर ने अपना किट खोला। उसमें से उसने दो थर्मामीटर बाहर किया। दोनों थर्मामीटर दो तरह के थे।

खदेरन ने डॉप्क्टर उठावन से पूछा, “आपने दो-दो थर्मामीटर क्यों रखे हैं?”

डॉक्टर उठावन सिंह ने कहा, “यह जो पहला थर्मामीटर है, उसे मैं मरीज़ के मुंह में लगाता हूं ताकि मुझे पता चले कि उसका शरीर कितना गर्म है?”

ख्देरन ने पूछा, ‘‘ठीक है। और यह दूसरा?”

डॉक्टर उठावन सिंह ने बताया, “यह दूसरा थर्मामीटर मैं मरीज़ की जेब में लगाता  हूं, जिससे मुझे यह पता चले कि उसकी जेब कितनी गर्म है?”

सोमवार, 29 नवंबर 2010

आराम की ज़रूरत है

खदेरन अचानक बीमार पड़ गया। बीमारी ठीक होने का नाम ही नहीं ले रही थी। चिंतित फुलमतिया जी उसे लेकर डॉक्टर के पास गई।

परीक्षण के बाद डॉक्टर उठावन सिंह ने कहा, “आपके पति को आराम की सख्त ज़रूरत है। ये लीजिए नींद की गोलियां।”

फुलमतिया जी ने पूछा, “ये गोलिया इन्हें कब दूं?”

डॉक्टर उठावन सिंह  ने बताया, “ये उनको नहीं देनी है। आपको लेनी है …..”

मंगलवार, 5 अक्टूबर 2010

टूटे दांत

टूटे दांत

डॉ. उठावन सिंह : आपके दो दांत कैसे टूट गए?
खदेरन : क्यूंकि फुलमतियाजी, मेरी पत्नी, ने बनाई थी सुखाड़ी!

खदेरन फुलमतिया - Copy - Copy डॉ. उठावन सिंह : तो खाने से मना कर देना था ना!
खदेरन : फिर तो बत्तीस के बत्तीस टूट गए होते!

रविवार, 29 अगस्त 2010

डॉक्टर की फीस

:: एक मुस्कान ही शांति की शुरुआत है! ::

डॉक्टर की फीस


उस दिन फाटक बाबू बड़े बेचैन से थे। घबराहट और बेचैनी की वजह से वो इधर-उधर घूम रहे थे। फाटक बाबू को परेशान हाल देख खदेरन ने उन्हें सलाह दिया (?!), “आप डॉक्टर को दिखा क्यों नहीं लेते?”

फाटक बाबू ने खदेरन की सलाह पर अमल करना ही उचित समझा और पहुँच गए डॉक्टर उठावन सिंह की क्लीनिक।
डॉक्टर
उठावन सिंह  ने पूछा, “क्या हुआ है?”

फाटक बाबू ने बताया, “कुछ नहीं बस मामूली सा दर्द है।”

डॉक्टर उठावन सिंह ने निरीक्षण किया और घोषणा की, “आप तो मामूली दर्द बता रहे थे, लेकिन आपकी तो दिल की धड़कन भी बहुत बढी हुई है।”

फाटक बाबू बोले, “हां, जी, वो ओ आपकी फीस का बिल देख कर बढ़ी है।”

मंगलवार, 10 अगस्त 2010

उम्र का प्रॉब्लम

हंसना ज़रूरी है, क्यूंकि …


हंसते समय हमारा दिमाग तनावमुक्त हो जाता है।

उम्र का प्रॉब्लम


कुछ दिनों से फाटक बाबू के बाएं पैर में बहुत दर्द हो रहा था.

एक दिन बेचारे डॉ उठावन सिंह के पास गए.

डॉ उठावन सिंह ने जांच-परख के बाद पैरों में कुछ गड़बड़ी नहीं पाया. फिर कुछ आयरन और कैल्सियम की गोलियां लिख कर बोला, "शायद यह उम्र ज्यादा होने के कारण हो रहा है."

फाटक बाबू सोच में पड़ गए, "मगर डॉक्टर साहेब ! दोनों पैर का उम्र तो एक्कहि है.... !"