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बुधवार, 7 जुलाई 2010

हे भगवान!

हे भगवान!

फाटक बाबू डायनिंग टेबुल पर बैठे खाना खाने। खंजन देवी ने खाना परोसा। पहला निवाला ही लिया कि गुस्से में फाटक बाबू चीखे, “आज तुमने कैसा खाना बनाया बनाया है, एकदम गोबर जैसा।”

 खंजन देवी अपना सर पीटते हुए बोलीं, “हे भगवान! इस आदमी ने क्या-क्या चखा हुआ है?”

मंगलवार, 6 जुलाई 2010

क्या कारण है?

क्या कारण है?

एक बार खदेरन आधी रात को सड़क पर घूम रहा था। इधर-उधर। उसे इस तरह घूमता देख एक पुलिस ने पकड़ लिया।

पुलिस इंस्पेक्टर ने उससे पूछा, “इतनी रात गए सड़क पर इधर-उधर घूम रहे हो, क्या कारण है?”

खदेरन ने कहा, “यदि मेरे पास कोई कारण होता तो मैं कभी का घर पहुँच कर उसे अपनी पत्नी फुलमतिया जी के सामने पेश कर चुका होता।”

सोमवार, 5 जुलाई 2010

सबसे बड़ी मुसीबत

सबसे बड़ी मुसीबत

फाटक बाबू से खदेरन ने पूछा, “आप अपने बटुए में हमेशा अपनी पत्‍नी की फोटो क्‍यों रखते हैं?”

फाटक बाबू ने बताया, “जब भी मेरे सामने कोई मुसीबत आती है, तो वह कितनी ही बड़ी क्‍यों न हो, अपना बटुआ निकालता हूँ, यह फोटो देखता हूँ और खुद को तसल्‍ली देता हूँ – सबसे बड़ी मुसीबत को तो मैं जेब में लेकर घूमता हूँ, यह क्‍या है? बस सब ठीक हो जाता है।”

रविवार, 4 जुलाई 2010

नाईट ड्रेस

नाईट ड्रेस

एक गधे ने फाटक बाबू को लात मारी और भाग गया ...

फाटक बाबू उसके पीछे भागे ......गधा तो मिला नहीं लेकिन जेब्रा मिल गया....

फाटक बाबू उसे जोर - जोर से मारने लगे.

" बदमाश ! नाईट ड्रेस पहन के उल्लू बनाता है ..."

शनिवार, 3 जुलाई 2010

पशुओं के डॉक्टर

एक व्यक्ति पशुओं के डॉक्टर के पास पहुंचा और कहा कि तबियत ठीक नहीं लग रही है, दिखाना है।

डॉक्टर ने कहा कि कृपया मेरे सामने वाले क्लीनिक में जाएं, मैं तो जानवरों का डॉक्टर हूं। वहां देखिए, लिखा हुआ है।

रोगी– नहीं डॉक्टर साब मुझे आप ही को दिखाना है।

डॉक्टर– अरे यार, मैं पशुओं का डॉक्टर हूं। मनुष्यों का इलाज नहीं करता।

रोगी– डॉक्टर साब मैं जानता हूं और इसीलिए आपके पास आया हूं।

इस पर डॉक्टर साब चौंक गए। जानते हो? फिर मेरे पास क्यों आए।

रोगी- मेरी तकलीफ सुनेंगे तो जान जाएंगे।

डॉक्टर- अच्छा बताओ।

रोगी– सारी रात काम के बोझ से दबा रहता हूं।
सोता हूं तो कुत्ते की तरह सोता हूं।
चौबीसों घंटे चौकस रहता हूं।
सुबह उठकर घोड़े की तरह भागता हूं।
रफ्तार मेरी हिरण जैसी होती है।
गधे की तरह सारे दिन काम करता हूं।
मैं बिना छुट्टी की परवाह किए पूरे साल बैल की तरह लगा रहता हूं।
फिर भी बॉस को देखकर कुत्ते की तरह दुम हिलाने लगता हूं।
अगर कभी, समय मिला तो अपने बच्चों के साथ बंदर की तरह खेलता हूं।
बीवी के सामने खरगोश की तरह डरपोक रहता हूं।

डॉक्टर ने पूछा – पत्रकार हो क्या?

रोगी- जी

डॉक्टर- इतनी लंबी कहानी क्या बता रहे थे। पहले ही बता देते। वाकई, तुम्हारा इलाज मुझसे बेहतर कोई नहीं कर सकता। इधर आओ। मुंह खोलो.. आ करो... जीभ दिखाओ....

शुक्रवार, 2 जुलाई 2010

मिस कॉल

हंसी के बारे में …

हंसना एक दवा है। हंसी का हमारे शरीर और मन दोनों पर एक सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जब हम हंसते हैं तो हमारे दिमाग से एक हॉर्मोन निकलती है। इस हॉर्मोन का नाम है एन्डोरफिन। यह हॉर्मोन हमारे शरीर को ऊर्जा से भर देता है।

हास्य फुहार : मिस कॉल

खंजन देवी फाटक बाबू को बता रही थी, “खदेरन एक नम्बर का कंजूस है।”

फाटक बाबू, “अच्छा! पर तुम्हें कैसे पता?”

खंजन ने समझाया, “ अब उसके कंजूसी का नमूना देखिए। एक बार उसके घर में आग लग गई। पर वह अपनी कोशिशों के बावज़ूद भी घर को जलने से बचा नहीं पाया।”

फाटक बाबू आश्चर्य से बोले, “क्यों?”

खंजन देवी ने बताया, “क्योंकि वो सारी रात फायब्रिगेड वालों को मिस कॉल ही मारता रहा।”

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गुरुवार, 1 जुलाई 2010

एक टांग पर

प्रश्न -- “ये बगुला एक टांग पर खड़ा क्‍यों होता है ?”

 

उत्तर -- “वो इसलिए कि उसे पता है कि अगर वो दूसरी टांग उठाएगा तो गिर जाएगा ।”