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मंगलवार, 16 नवंबर 2010

बात-चीत

अब फाटक बाबू क्यों नहीं परेशान हों खंजन देवी से। ज़रा दोनों की बात-चीत सुनिए….

“डिनर पर बाहर चलें?”

“हां”

“क्या खाओगी?”

“कुछ भी।”

“चाइनीज़?”

“नहीं, मुझे गैस हो जाता है।”

“साउथ इंडियन?”

“क्या फाटक बाबू परसों ही तो खाए थे।”

“तो .. फिर … नॉन भेज?”

“अभी छठ के समय, आप भी न … पर्व त्योहार का भी ख्याल नहीं रखते।”

“तो रोटी-तड़का?”

“वही बोरिंग खाना…।”

“तो फिर तुम्ही बताओ…क्या खाना है?”

“कुछ भी।”

रविवार, 24 अक्टूबर 2010

चिंतन!

चिंतन!

फाटक बाबू ने इस दशहरे के दर्म्यान ने वस्त्रों की खरीद में एक टी शर्ट खरीद लिया। और अपनी टी शर्ट पर लिख दिया
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खंजन देवी आज बहुत ख़ुश थीं। बोलीं, “SOLID JEE! THATS ATTITUDE! … THINK DIFFERENT & THINK POSITIVE!!”

मंगलवार, 12 अक्टूबर 2010

निबंध

निबंध

भगावन के क्लास टीचर का संदेश मिला कि अभिवावक आकर फ़ौरन मिलें। फुलमतिया जी और खदेरन दूसरे रोज़ पहुंचे खदेरन के स्कूल। रास्ते भर खदेरन और फुलमतिया जी भगावन से पूछते रहे कि आखिर माज़रा क्या है, यूं अचानक क्लास टीचर ने उन्हें क्यों बुलाया है, पर भगावन कुछ भी नहीं बता सका।

जब वे क्लास टीचर के सामने हाज़िर हुए तो उसने पूछा, “मिस्टर खदेरन, ये निबंध, कुत्ते पर आपके बेटे ने कल सबमिट किया था।”

खदेरन ने जवाब दिया, “जी हां।”

क्लास टीचर ने आगे पूछा, “ये क्योंकर संभव हुआ कि यह निबंध हूबहू उसी तरह का है जिस तरह का निबंध पिछले साल आपकी बेटी ने सबमिट किया था जब वह मेरे क्लास में थी।”

इससे पहले कि खदेरन कुछ सफ़ाई देता फुलमतिया जी बोल पड़ी, “तो इसमें हैरान होने की क्या बात है? कुत्ता भी तो हूबहू वही है!”

बुधवार, 29 सितंबर 2010

अहमियत

अहमियत

सुबह सुबह फटक बाबू और खंजन देवी नाश्ता के टेबुल पर बैठे नाश्ता कर रहे थे। तभी खंजन देवी ने कहा, “एक बात मैं शर्त लगा कर कह सकती हूं, कि आज का दिन आपको याद नहीं होगा।”

फाटक बाबू दफ़्तर जाने की हड़बड़ी में थे। नाश्ते के टेबुल पर तो कुछ नहीं बोले, पर दफ़्तर जाने से पहले थोड़ा नराज़ स्वर में बोलते गए, “बिल्कुल याद है!” और फाटक बाबू निकल गए।

खंजन देवी उनको जाते हुए देखती रही।

१० बजे कॉल बेल बजी। खंजन देवी ने दरवाजा खोला तो सामने दफ़्तर का चापरासी एक बुके खंजन देवी को थमा गया। बोला साहब ने भिजवाया है।

१२ बजे फिर कॉल बेल बजी। खंजन देवी ने दरवाजा खोला तो सामने दफ़्तर का चापरासी चौकलेट से भरा बक्सा खंजन देवी को थमा गया। बोला साहब ने भिजवाया है।

२ बजे फिर कॉल बेल बजी। खंजन देवी ने दरवाजा खोला तो सामने दफ़्तर का चापरासी बुटिक से डिजाइनर ड्रेस खंजन देवी को थमा गया। बोला साहब ने भिजवाया है।

image0044 खंजन देवी फाटक बाबू के दफ़्तर से आने की प्रतीक्षा आज बड़ी बेसब्री से कर रही थी। ६ बजे फिर कॉल बेल बजी। खंजन देवी ने दरवाजा खोला तो सामने फाटक बाबू थे। खंजन देवी बोलीं, “पहले पुष्प गुच्छ, फिर चौकलेट, फिर इतना सुंदर ड्रेस, मुझे पता नहीं था कि मेरी मम्मी का जन्मदिन आपके लिए इतनी अहमियत रखता है।”

रविवार, 5 सितंबर 2010

लॉंन्ग ड्राइव पर….!

:: हंसने से चिंता, दुख,गुस्से, चिड़चिड़ेपन,आदि से निज़ात मिलती है। ::

लॉंन्ग ड्राइव पर….!


फाटक बाबू ने एक सेकेण्ड हैंड क्या थर्ड या फ़ोर्थ हैंड कार ख़रीद ली। फिर चलाना भी सीख लिया। एक दिन बहुत मिन्नत-मनौत करके खंजन देवी को घुमाने ले गए।


सड़क पर दिशाहीन भटकते देख कर खंजन देवी ने फाटक बाबू से पूछ ही लिया, “ऐ जी! हम कहां जा रहे हैं?”


फाटक बाबू ने जवाब दिया, “लॉन्ग ड्राइव पर ….!”

 

खंजन देवी से रहा नहीं गया, शिकायत कीं, “पहले क्यों नहीं बताया…?”


फाटक बाबू ने समझाया, “मुझे भी अभी-अभी ही पता चला है, जब कार का ब्रेक फ़ेल हुआ है….!”

शनिवार, 28 अगस्त 2010

आने जाने में …

हंसना ज़रूरी है, क्यूंकि …


हंसने से हम मन की शक्ति का अधिक से अधिक प्रयोग कर पाते हैं।

आने जाने में …


आपको तो मालूम है फाटक बाबू ने गाड़ी ख़रीद ली है। पुरानी है तो क्या हुआ?

चलाना भी सीख लिया है, नवसिखुआ हैं तो क्या हुआ?

एक दिन उन्होंने खंजन देवी को कहा, “गाड़ी तो अब चलाना सीख ही गया हूँ। सोचता हूँ गांव हो आऊँ।”

maan_manthara खंजन देवी ने पूछा, “कब लौटेंगे?”


 

फाटक बाबू बोले, “कल शाम तक। कोई वहां रुकना थोड़े ही है। लोगों को गाड़ी दिखाना है। बस!”

… और फाटक बाबू चल दिए गांव के लिए। खंजन देवी उनके लौटने की प्रतीक्षा करती रहीं। फाटक बाबू लौटे छह दिनों के बाद।

maan_manthara चिंतित खंजन देवी ने पूछा, “आप तो बोले थे कि दूसरे दिन ही लौट आऊँगा, पर इतने दिन लगा दिए?”

फाटक बाबू ने बताया, “जाने में तो एक ही दिन लगा पर आने में पांच दिन लग गए।”

maan_manthara खंजन देवी की चिंता न मिटी। पूछी, “क्यों?”


 

फाटक बाबू ने बताया, “ये कार बनाने वाले भी ग़ज़ब के लोग हैं! जाने के लिए तो पांच गियर बनाए हैं, पर लौटने के लिए सिर्फ़ एक गियर है - (रिवर्स गियर!)।”

मंगलवार, 27 जुलाई 2010

तुम्हारा क्या कहना है?

हंसना ज़रूरी है, क्यूंकि ….


हंसने से मानसिक तनाव में कमी आती है।

तुम्हारा क्या कहना है?


एक दिन शाम के वक़्त फाटक बाबू गार्डेन में आराम चेयर पर आधा बैठे और आधा लेटे चाय की चुस्कियों का मज़ा ले रहे थे। इतने में खंजन देवी आ गईं और उनके बगल में बैठ कर आहें भरने लगीं।

फाटक बाबू को अपने में ही मस्त देख बोलीं, “शादी से पहले तो तुम पड़ोस की छत से कूद कर मुझसे मिलने आते थे। अब तो तुम्हारे दिल में मेरे लिए ज़रा भी प्यार नहीं रहा।” फाटक बाबू को कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं करते देख बोलीं, “तुम्हारा क्या कहना है?”

फाटक बाबू ने कहा, “कहना क्या है! अब तो जी चाहता है, उसी छत से नीचे कूद जाऊँ!!”

शनिवार, 24 जुलाई 2010

दो आंखें बत्तीस दांत

हंसना ज़रूरी है, क्योंकि …

चार्ली चैपलीन कहते थे, ज़िन्दगी में सबसे बेकार दिन वह है जिस दिन आप नहीं हंसे।

दो आंखें बत्तीस दांत


उस दिन खंजन देवी ने दोपहर का भोजन फाटक बाबू को परोसा।

 

पहला निवाला फाटक बाबू के  मुंह के अंदर गया तो यह जुमला बाहर आया, “भगवान ने तुम्हें दो-दो आंखें दी है, दाल से कंकड़ बीन नहीं सकती थीं?”

इतना सुनना था कि खंजन देवी का प्यार उमड़ पड़ा, बोलीं, “भगवान ने तुमको भी तो बत्तीस दांत दिए हैं, तुम चबा नहीं सकते थे?”

गुरुवार, 22 जुलाई 2010

ग़लत समझ

हंसना ज़रूरी है, क्यूंकि ….


हंसने से टी सेल्स की संख्या में वृद्धि होने से हृदय रोग की कम संभावना होती है।

ग़लत समझ

एक दिन फाटक बाबू और खंजन देवी में सुबह-सुबह ही तकरार हो गई। और वह थमने की जगह बढ़ती ही गयी।

 

कुछ देर बाद खंजन देवी सुबकने लगीं। सुबकते-सुबकते बोलीं, “काश! मैंने अपनी मां की बात मानी होती और आपसे शादी न की होती!”

 

फाटक बाबू पहले तो चौके, फिर बोले, “क्या…? कया कहा तुमने..? तुम्हारी मां ने मुझसे शादी न करने की राय दी थी?”

 

खंजन देवी बोलीं, “और नहीं तो क्या?”

 

फाटक बाबू अफसोस जताते हुए बोले, “हे भगवान! मैं आज तक उस महिला को कितना ग़लत समझ रहा था ….!”

बुधवार, 7 जुलाई 2010

हे भगवान!

हे भगवान!

फाटक बाबू डायनिंग टेबुल पर बैठे खाना खाने। खंजन देवी ने खाना परोसा। पहला निवाला ही लिया कि गुस्से में फाटक बाबू चीखे, “आज तुमने कैसा खाना बनाया बनाया है, एकदम गोबर जैसा।”

 खंजन देवी अपना सर पीटते हुए बोलीं, “हे भगवान! इस आदमी ने क्या-क्या चखा हुआ है?”

शुक्रवार, 2 जुलाई 2010

मिस कॉल

हंसी के बारे में …

हंसना एक दवा है। हंसी का हमारे शरीर और मन दोनों पर एक सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जब हम हंसते हैं तो हमारे दिमाग से एक हॉर्मोन निकलती है। इस हॉर्मोन का नाम है एन्डोरफिन। यह हॉर्मोन हमारे शरीर को ऊर्जा से भर देता है।

हास्य फुहार : मिस कॉल

खंजन देवी फाटक बाबू को बता रही थी, “खदेरन एक नम्बर का कंजूस है।”

फाटक बाबू, “अच्छा! पर तुम्हें कैसे पता?”

खंजन ने समझाया, “ अब उसके कंजूसी का नमूना देखिए। एक बार उसके घर में आग लग गई। पर वह अपनी कोशिशों के बावज़ूद भी घर को जलने से बचा नहीं पाया।”

फाटक बाबू आश्चर्य से बोले, “क्यों?”

खंजन देवी ने बताया, “क्योंकि वो सारी रात फायब्रिगेड वालों को मिस कॉल ही मारता रहा।”

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शुक्रवार, 25 जून 2010

पूरे जहान में …. !

 

पूरे जहान में….!

फाटक बाबू की पत्‍नी खंजन ने एक दिन फाटक बाबू से कहा, “पूरे जहान में चिराग लेकर भी ढूंढोगो तो मेरी जैसी पत्‍नी नहीं मिलेगी।”

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फाटक बाबू ने जवाब दिया, “ये तुमसे किसने कहा कि दूसरी बार भी मैं तुम जैसी ही ढूंढूगा।”

बुधवार, 9 जून 2010

अंतर

अंतर

खंजन देवी ने अपनी सहेली मैना देवी से बातों बातों में पूछा,

“ब्यॉय फ्रेंड और हसबैंड में क्या अंतर है?”

मैना देवी ने जवाब दिया,

“लगभग 20 किलो।”

रविवार, 6 जून 2010

आप उदास क्यों है?

आप उदास क्यों हैं?

_a_checkpoint01 नौकरानी फुलमतिया अपनी मालकिन खंजन को उदास देखकर पूछती है,

“आप उदास क्यों है? ”

_a_checkpointEVIL01 मालकिन खंजन नौकरानी फुलमतिया को अपने उदास होने का राज़ बताती है,

“तुम्हारे साहब अपने ऑफिस की टाइपिस्ट से प्यार करने लगे हैं।”

_a_checkpoint02 मालकिन खंजन की बात सुन नौकरानी फुलमतिया चीखती है,

“नहीं ऐसा नहीं हो सकता। यह बात आप मुझे जलाने के लिए कह रही हैं।”