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मंगलवार, 24 अगस्त 2010

प्यार से बोला …

हंसना ज़रूरी है, क्यूंकि …


हा-हा … हा-हा करके हंसने से धमनियों और शिराओं का फैलाव होता है और वे फ्लेक्सिबल हो जाती हैं। इससे ब्लड सर्कुलेशन सुचारू रूप से होता है।

प्यार से बोला …


एक बार खदेरन कहीं जा रहा था। इतने में बम विस्फोट हुआ और अन्य लोगों के साथ वह भी घायल हो गया।

दारोगा दहारन सिंह जांच करने वाले दारोगा दहारन सिंह ने घायल खदेरन से पूछा, “क्या जब तुम वहां खड़े थे तो बम तब फट गया था?”

खदेरन फुलमतिया - Copy खदेरन को गुस्सा आ गया। वह बोला, “नहीं, … बम चुपके से मेरे पास रेंगकर आया और बड़े प्यार से बोला, ठा …..!”

रविवार, 8 अगस्त 2010

प्रवचन

हंसना ज़रूरी है, क्यूंकि …


खूब हंसना हास्य ध्यान योग लगाने के लिए बहुत ज़रूरी है।

प्रवचन


खदेरन उस दिन फिर दोस्तों की मंडली में कुंडली लगा कर बैठ गया। आधी रात तक महफ़िल जमी रही। … और जब वह दोस्तों की महफ़िल में होता है तो क्या होता है अब तक तो आप जान ही गए होंगे।

 

.. तो आधी रात को वह झूमता-झामता हुआ शराब के नशे में धुत्त सड़क पर चला जा रहा था। उसे इस दशा में देख दारोगा दहारन सिंह ने उसे टोका। “ऐ सुन …!”

 

खदेरन बोला, “कया है….?”

 

दारोगा दहारन सिंह दारोगा दहारन सिंह ने पूछा, “अबे! नशे में धुत्त कहां जा रहा है?”

 

 

खदेरन फुलमतिया खदेरन ने पहचानते हुए कहा, “ओह! दारोगा साब! मैं शराब पीने से होने वाले नुकसान पर प्रवचन सुनने जा रहा हूं।”

 

खदेरन फुलमतिया दारोगा दहारन सिंह चौंके, बोले, “इतनी रात को कौन प्रवचन देगा?”

 

खदेरन ने बताया, “फुलमतिया जी, मेरी बीवी।”