बुझावन के प्रश्न, बतावन का जवाब!-11 |
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शनिवार, 20 नवंबर 2010
बुझावन के प्रश्न, बतावन का जवाब!-11
शुक्रवार, 19 नवंबर 2010
आज सिर्फ़ एक चित्र
गुरुवार, 18 नवंबर 2010
घटी उम्र
बुधवार, 17 नवंबर 2010
कबाड़ी
एक बार फुलमतिया जी और खदेरन एक रेस्तरां में बैठे खाना खा रहे थे।
खाने के बीच में फुलमतिया जी बोलीं, “देखो, उधर कोने वाली कुर्सी पर बैठा आदमी तुम्हें घूर रहा है।’
खदेरन बोला, “तो उसे घूरने दो ना।”
फुलमतिया जी बोलीं, “मैं उसे जानती हूं।”
खदेरन, “अच्छा! कौन है?”
फुलमतिया जी, “कबड़ी है। हमेशा बेकार की चीज़ों मे दिलचस्पी लेता है।”
मंगलवार, 16 नवंबर 2010
बात-चीत
अब फाटक बाबू क्यों नहीं परेशान हों खंजन देवी से। ज़रा दोनों की बात-चीत सुनिए….
“डिनर पर बाहर चलें?”
“हां”
“क्या खाओगी?”
“कुछ भी।”
“चाइनीज़?”
“नहीं, मुझे गैस हो जाता है।”
“साउथ इंडियन?”
“क्या फाटक बाबू परसों ही तो खाए थे।”
“तो .. फिर … नॉन भेज?”
“अभी छठ के समय, आप भी न … पर्व त्योहार का भी ख्याल नहीं रखते।”
“तो रोटी-तड़का?”
“वही बोरिंग खाना…।”
“तो फिर तुम्ही बताओ…क्या खाना है?”
“कुछ भी।”
सोमवार, 15 नवंबर 2010
दूसरा उदाहरण कोई नहीं
एक दिन गार्डेन में बैठा-बैठा खदेरन कुछ याद कर रहा था और मुस्कुरा रहा था। फाटक बाबू ने देखा तो पूछ लिया, “क्या बात है खदेरन? क्या याद आ गया?”
खदेरन बोला, “फाटक बाबू क्या बताएं, शादी के पहले की बात है।
फुलमतिया जी मुझे पसंद आ गईं थीं, तो चले गए उसके घर और फुलमतिया जी के पिता गेंदा सिंह को इंप्रेस करने के चक्कर में उनसे बोलना शुरु कर दिया,
सर जी, मेरे जैसा लड़का आप को चिराग लेकर ढूंढने पर नहीं मिलेगा। न तो मैं शराब पीता हूं, न ही अलब-कल्ब जाता हूं, दफ़्तर से भी सीधा घर आता हूं, आपकी बेटी मेरे साथ बहुत ख़ुश रहेगी।
तो जनते हैं फाटक बाबू फुलमतिया जी के पिता जी ने क्या कहा, उन्होंने कहा, सॉरी खदेरन बाबू, मैं अपनी बेटी की शादी आपसे नहीं कर सकता… अगर आपको दामाद बना लिया तो मेरी बीवी आपका उदाहरण दे-दे कर मेरा जीना मुश्किल कर देगी! हा-हा-हा….
रविवार, 14 नवंबर 2010
खाली पेट
खदेरन को फुलमतिया जी बात बे-बात बुद्धू कहती थीं। खदेरन को भी लगने लगा कि उसका आई.क्यू. कम है। उसने एक कोचिंग क्लास ज्वायन किया जहां आई.क्यू. बढाने के टिप्स दिए जाते थे।
एक दिन कक्षा में सिखाया जा रहा था। प्रशिक्षक ने खदेरन से पूछा तुम खाली पेट कितनी रोटियां खा सकते हो?”
खदेरन ने कहा, “१०!”
इस पर प्रशिक्षक ने उसे समझाया, “ग़लत! जैसे ही तुम एक रोटी खाओगे, तुम्हारा पेट खाली नहीं रहेगा। इसलिए तुम खाली पेट १० रोटियां नहीं खा सकते। समझे?”
“जी समझ गया।” खदेरन आज बहुत खुश था। उसने एक नई जानकारी हासिल की थी। अब जाकर फुलमतिया जी का टेस्ट लेगा।
घर पहुंचकर उसने फुलमतिया जी से पूछा, “तुम खाली पेट कितनी रोटियां खा सकती हो?”
फुलमतिया जी ने कहा, “६ रोटियां।”
यह सुन खदेरन का मुंह उतर गया।
उसे उदास देख फुलमतिया जी ने पूछा, “क्यों क्या हुआ? उदास क्यों हो गए?”
खदेरन उदास स्वर में बोला, “यदि आप १० रोटियां कहतीं, तो मैं आपको ऐसा जवाब देता कि आप मेरी समझदारी पर हैरान रह जातीं!”