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रविवार, 27 नवंबर 2011

परी आकाश में

images (68)खदेरन के बेटे भगावन ने अपनी मम्मी फुलमतिया जी से पूछा, “मम्मी! क्या परी आकाश में उड़ती है?”

फुलमतिया जी ने कहा, “हां बेटा!”

भगावन ने फिर पूछा, “तो अपनी कामवाली झुनझुनिया उड़ती क्यों नहीं?”

फुलमतिया जी ने कहा, “झुनझुनिया परी थोड़े न है ..!”

भगावन ने कहा, “पर पापा तो उसे परी कहते हैं!”

फुलमतिया जी ने गुस्से से तमतमाते हुए कहा, “अच्छा! आने दे, उसे उड़ाकर ही दिखाऊंगी तुझे …!”

बुधवार, 23 नवंबर 2011

फ़रमाईश

भंगेरन : मैं तुम्हे सच में बहुत पसंद करता हूँ.........

भगजोगनी : मेरी चप्पल का साइज पता है न... ?

भंगेरन : लो कर लो बात........ दोस्ती हुई नहीं कि.... फ़रमाईश शुरु...!

रविवार, 13 नवंबर 2011

महंगी जगह की सैर!

“अजी सुनते हो?” फुलमतिया जी ने खदेरन को पुकारा।

“हम्म” खदेरन का संक्षिप्त जवाब था।

“फाटक बाबू खंजन दी को काफ़ी महंगी-महंगी जगह घुमा कर लाए हैं।” फुलमतिया जी ने बताया।

किसी उधेर-बुन में लगा, खदेरन ने फिर “हूं-हां” में ही जवाब दिया।

यह देख फुलमतिया जी को लगा कि सीधे मुद्दे पर आया जाए। बोलीं, “मुझे भी किसी महंगी जगह घुमाने ले चलो ना!”

खदेरन उसी धुन में बोलता गया, “चलो तैयार हो जाओ, चलते हैं।”

खुश हुई फुलमतिया जी के मन में शंका भी जनमी, उन्होंने दूर करना ही उचित समझा। पूछीं, “कहां-कहां ले चलोगे?”

खदेरन ने बताया, “पहले पेट्रोल पंप चलेंगे, फिर गैस एजेन्सी के यहां और अंत में सब्जी मंडी!!”

शुक्रवार, 11 नवंबर 2011

सबूत

जज : क्या सबूत है कि तुम गाड़ी स्पीड में नहीं चला रहे थे।

खदेरन : माई-बाप! मैं फुलमतिया जी को लाने ससुराल जा रहा था।

 

एक गम्भीर दृष्टि खदेरन पर डालते हुए जज ने फैसला सुनाया :

परिस्थिति-जन्य साक्ष्य के आधार पर अभियुक्त पर लगाया गया इलज़ाम साबित नहीं होता इसलिए केस डिसमिस!