किताबे ग़म में ख़ुशी का ठिकाना ढ़ूंढ़ो,
अगर जीना है तो हंसी का बहाना ढ़ूंढ़ो।
समर्थक
शुक्रवार, 23 दिसम्बर 2011
लड़ाई सीट के लिए
खदेरन बस में जा रहा था।
उसके बगल की सीट खाली थी।
एक स्टॉप पर दो लड़कियां चढ़ीं। उस पर बैठने के लिए दोनों लड़ने लगीं। काफ़ी देर तक लड़ती रहीं। खदेरन ने कहा, “क्यों लड़ रही हो दोनों। जो तुम दोनों में बड़ी हो, वह बैठ जाए।”
Nice post .
प्रत्युत्तर देंहटाएंhttp://hindi-blogging-guide.blogspot.com/2011/08/hindi-blogging-guide.html
badhiya .
प्रत्युत्तर देंहटाएंयह तो न्याय की पराकाष्ठा हो गयी।
प्रत्युत्तर देंहटाएंविक्रम का तिकड़म!
प्रत्युत्तर देंहटाएंनीर क्षीर विवेक!!
प्रत्युत्तर देंहटाएं:))
प्रत्युत्तर देंहटाएं