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शनिवार, 12 मार्च 2011

रिझाने की कोशिश

खदेरन और फुलमतिया जी के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया।

दोनों जब जमकर लड़ चुके तो फुलमतिया जी ने चीखते हुए कहा, “मैं जा रही हूं मायके और वहां जाकर तालाक के लिए मुकदमा दायर कर दूंगी, हां।”

खदेरन ने कहा, “चलो हटो! अब ऐसी झूठी-मूठी, मीठी-मीठी बातें करके रिझाने की कोशिश मत  करो।”

11 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब!
    हमारे उच्चारण पर भी कभी-कभी आया करें!

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  2. खुशी अचानक मिल जाये तो सहसा विश्वास करना मुश्किल हो जाता है!!

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