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शुक्रवार, 22 जुलाई 2011

छाता की ख़रीद

पोपट को अब जाकर इस बरसात में छाता खरीदने की सूझी। अपने बजट के अनुसार एक छाता उसने पसंद किया और दूकानदार द्वारा बताए गए मूल्य के आधे से अधिक में वह लेने को राज़ी न था।

दूकनादार ने भी मन ही मन सोचा ‘पचास रुपये में इसे बेचना कम तो है, पर चलो क्या हुआ प्रोफ़िट मार्जिन थोड़ा कम है पर यह माल निकल तो जाएगा!’

उसने हामी भर दी।

छाता हाथ में लेकर पोपट ने उसे घुमा-फिरा कर देखा और दूकानदार से पूछा, “यह छाता पांच-छह साल चल तो जाएगा ना?”

दूकानदार ने कहा, “बस इसे धूप-और पानी से बचा कर रखिएगा, पांच-छह साल क्या उससे भी ज़्यादा चल जाएगा!!”

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