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मंगलवार, 3 जुलाई 2012

बाबा के दरबार में

खदेरन को बाबा की कृपा चाहिए थी।

वह उनके दरबार में पहुंचा। उनके चरणों पर उसने अपनी जन्म-कुंडली धर दी।

बाबा ने बोलना शुरू कर दिया, “तेरा नाम खदेरन है?”

“जी।”

“तेरी पत्नी का नाम फुलमतिया जी है?”

“जी!”

“तेरा एक लड़का है जिसका नाम भगावन है?”

“जी-जी!!”

“तूने कल बीस किलो गेहूं ख़रीदा है?”

“जी-जी-जी!!! आप तो अंतर्यामी हैं बाबा! कृपा कीजिए इस दास पर।”

“बेवकूफ़! अगली बार कुंडली लेकर आना, राशनकार्ड नहीं।”

15 टिप्‍पणियां:

  1. बेचारा क्या करे -काला आखर भैंस बराबर !

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  2. हा हा!! खदेरन खदेरन ही रह गया!!

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  3. वाह वाह खदेरन ...क्या बात है ..हा हा हा

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  4. :):) बाबा को तो कृपा फिर भी करनी चाहिए थी

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  5. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  6. हा हा हा. हा हा हा. हा हा हा. हा हा हा.

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  7. ha ha ha ha

    very gud, aj kal ke panit bhi aise hain aur jajmaan bhi

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