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बुधवार, 4 जुलाई 2012

सिवाए तारीफ़ के …

अख़बार पढ़ते खदेरन की नज़र एक समाचार पर टिक कर रह गई। इस विशेष और शोधपूर्ण अलेख को अपनी श्रीमती से शेयर करने से वह अपने-आपको रोक नहीं पाया।

ज़ोर से बोला, “फुलमतिया जी, कितनी ख़ुशी की बात है, आपको भी मालूम होना चाहिए। मूर्ख आदमियों की बीवियां सुंदर हुआ करती हैं।”

फुलमतिया जी ने इठलाते हुए कहा, “जाओ भी, तुमको तो मेरी तारीफ़ के सिवा कुछ सूझता ही नहीं।”

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