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शनिवार, 28 नवंबर 2009

फाटक बाबू -3

अगर पसंद आया तो दिल खोलकर ठहाका लगाइएगा।


एक रात फाटक बाबू शराब के नशे में सड़क पर पैदल जा रहे थे। उनका एक पैर फूटपाथ पर था तो दूसरा सड़क पर।

तभी थानेदार की नज़र उन पर पड़ी। पीछे से थानेदार ने एक धौल जमाते हुए कहा, “क्यों बे कितनी पी रखी है तूने?”

फाटक बाबू बोले, “याद दिलाने के लिए शुक्रिया कि मैंने पी रखी है। मैं तो तब से यही सोच रहा था कि अचानक मैं लंगड़ा क्यों हो गया हूँ?”

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अगर पसंद आया तो ठहाके लगाइएगा
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5 टिप्‍पणियां:

  1. "आप कहीं जा रहे हों और बिल्ली आपका रास्ता काट जाए तो इसका क्या मतलब है?"
    "इसका बस इतना सा मतलब है कि बिल्ली भी कहीं जा रही है"
    हा हा हा

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  2. हा हा हा ....अबसे कोई ऐसी हालत में मिल गया तो हम भी उसे याद दिला देंगे कि वो लंगडा नहीं है

    अजय कुमार झा

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