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शुक्रवार, 3 जून 2011

समझदारी

एक दिन फाटक बाबू और खदेरन बरामदे में बैठे गप-शप कर रहे थे।

बात-चीत का क्रम घूम-फिर कर शादी पर आ पहुंचा।

फाटक बबू ने पूछा, “खदेरन, तुमको नहीं लगता कि ज़रा सी समझदारी से लाखों तलाक के मामले रोके जा सकते हैं?”

खदेरन ने जवाब दिया, “फाटक बबू, आपको नहीं लगता कि ज़रा सी समझदारी से शादियां भी तो रोकी जा सकती हैं!”

15 टिप्‍पणियां:

  1. ना रहेगा बांस, तो कैसे बजेगी बांसुरी,

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  2. सही बात है, कोई सोच कर तो देखे।

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  3. हा-हा-हा ...
    समझदारी का जवाब नहीं ...!

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  4. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (04.06.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
    चर्चाकार:-Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)
    स्पेशल काव्यमयी चर्चाः-“चाहत” (आरती झा)

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  5. इसको कहते हैं बीमारी की जड़ तक पहुँचना!!

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