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शनिवार, 4 जून 2011

हम तुम कहीं को जा रहें हो और रास्ता भूल जाएं

फुलमतिया जी खदेरन के साथ फ़िल्म देख रही थीं। फ़िल्म vcm_s_kf_repr_321x380का नाम था, बॉबी। गाना चल रहा था, ‘हम तुम कहीं को जा रहें हो और रास्ता भूल जाएं, सोचो कभी ऐसा हो तो क्या हो?’

फुलमतिया जी की चतुर बुद्धि में एक प्रश्न आया, “ए जी! अगर मैं खो गई, तो तुम क्या करोगे?”

खदेरन ने माथे पर बल डाला और जवाब दिया, “मैं अखबार में छपवाऊंगा!”

फुलमतिया जी का मन प्रसन्न हुआ, बोली, “तुम कितने अच्छे हो!” फिर पूछा, “क्या छपवाओगे?”

खदेरन ने बताया, “फुलमतिया जी, मैं छपवाऊंगा कि आप जहां भी हों, आराम से रहें और खुश रहें!”

13 टिप्‍पणियां:

  1. :):) कितना ध्यान रखते हैं फुलमतिया जी का

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  2. हा हा!! साथ में यह भी छपवा देना था कि रुपये पैसे की चिन्ता न करना..मैं हूं न!!!

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