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सोमवार, 22 फ़रवरी 2010

वरमाला

वरमाला

श्रीमान और श्रीमती जी टी.वी पर रामायण सीरियल देख रहे थे। प्रसंग था सीता स्वयंवर का। श्रीरामजी ने धनुष तोड़ा। करतल ध्वनी हुई। सीताजी आई। रामजी का चरणस्पर्श किए। वरमाला पहनाई।

यह दृश्य देख श्रीमान जी को अपना वरमाला याद आ गए। शिकायत के लहजे में बोले, “तुमने तो वरमाला के पहले मेरे चरण नहीं छुए थे …..

श्रीमती जी कोई मौका चूकती थोड़े ही थी। बोली, “हां नहीं छूए थे ….. तो तुमने कौन सा धनुष तोड़ा था, और फिर यह जो सीरियल चल रहा है इसकी सीता जी को ये सब करने के लिए लाखों रूपये मिले हैं।

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15 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब----पढ़ कर मजा आ गया। पूनम

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  2. ghuma phira kar baat paise par hi kyon khatam hoti hai!

    ati uttam.

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