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मंगलवार, 22 फ़रवरी 2011

गर्लफ़्रेण्ड

एक दिन फुलमतिया जी और खदेरन बाज़ार से गुज़र रहे थे। इतने में एक भिखारी आया और खदेरन को संबोधित करते हुए बोलने लगा, “साहब! दस रुपए दे दो साहब! दस दे दो गर्लफ़्रेण्ड को फोन करना है।”

यह सुन फुलमतिया जी ने खदेरन पर ताना मारा, “देखो! भिखारी भी अपनी गर्लफ़्रेण्ड को कितना प्यार करता है!”

यह सुन भिखारी बोला, “अरे नहीं मेम साहब! बात इसके उलट है। उसे प्यार करने के बाद ही मैं भिखारी बना हूं।”

17 टिप्‍पणियां:

  1. प्रेम में ऐसा भी होता है , हम तो सोचते थे सिर्फ विवाह में होता है :)

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  2. अभी तो इश्क ही हुआ है बेटा... शादी के बाद पता चलेगा :)

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  3. भिखारी बन गया फिर भी सुधरा नहीं अभी भी उसी के पीछे है |

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  4. कितने लोग कंगाल बन गए ... इश्क की दुनिया में ...
    मज़ेदार!
    हा-हा-हा....

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  5. कुछ ऐसा ही फ़रमाया था शाहजहाँ ने ताजमहल देखकर कि बात बात में बहुत ख़र्चा हो गया!

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  6. प्यार नासमझी से किया जाये तो ऐसा भी हो सकता है.

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