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बुधवार, 23 फ़रवरी 2011

आज सिर्फ़ एक चित्र। इस चित्र का शीर्षक क्या हो?

बहुत दिनों से चित्र को लेकर कोई हास्य सृजन नहीं हुआ। तो इस बार “मैं और मेरा चित्र (कुत्ता)” पर कुछ लिखें।

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13 टिप्‍पणियां:

  1. आपके ब्लाग पर पहली बार आया। अच्छआ लगा। आभार।

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  2. वाह जी वाह कुत्ता भी आदमी सा नजर आता है.यह सब संगत का ही तो परिणाम है.आपने तो ऐसी संगत नहीं की न .यदि संगत ही करनी है तो आइये मेरे ब्लॉग "मनसा वाचा कर्मणा " पर. आनंद आ जायेगा सच में . प्रणाम

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  3. कब के बिछड़े हुए हम किस रूप में आ के मिले |

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  4. यह फोटो तो डार्विन को देखनी चाहिए थी. विकासवाद का एक और चैप्टर लिख लेते.

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  5. बहुत बार समझाया भौंक-भौंक कर कि मेरे बिस्कुट और 'पेडिग्री' मत खाया कर........अब ले मजा

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