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सोमवार, 2 अगस्त 2010

लायक़ - नालायक़

हंसना ज़रूरी है क्यूंकि …


हंसी कैलोरी बर्न करने में सहायक होती है।

लायक़ – नालायक़


खदेरन के दोस्त बुझावन ने उससे पूछा, “तुम नालायक को लायक़ बना सकते हो।”

खदेरन ने कहा, “बिल्कुल बना सकता हूं।”

बुझावन ने पूछा, “कैसे?”

खदेरन ने बताया, “नालायक से ना अक्षर हटा कर!”

17 टिप्‍पणियां:

  1. हिन्दी का विद्यार्थी होगा
    सही उपाय

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  2. वाह भई खदेरन तुम तो बुझावन से कहीं ज़यादा लायक निकले.

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  3. बहुत बढ़िया!
    यह तो लाल पेन से काला लिखना जैसा हुआ न!

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  4. बुझावन भी बुझ गए होंगे कि किसी लायक़ आदमी से पाला पड़ा है.

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  5. इतना आसान है नालायक को लायक बनाना ..हमें तो पता ही नहीं था ...!

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  6. वाह बेटा जी आप तो बढे ना ....लायक निकले !

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  7. सबसे सस्ता सरल और टिकाऊ उपाय है ..हा हा हा

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  8. लायक क्या जी वो तो नायक भी बन सकते हैं अगर ला हटा दे तो..इसमें कौनो बड़ी बात नहीं है भाई.

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  9. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

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