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शनिवार, 28 अगस्त 2010

आने जाने में …

हंसना ज़रूरी है, क्यूंकि …


हंसने से हम मन की शक्ति का अधिक से अधिक प्रयोग कर पाते हैं।

आने जाने में …


आपको तो मालूम है फाटक बाबू ने गाड़ी ख़रीद ली है। पुरानी है तो क्या हुआ?

चलाना भी सीख लिया है, नवसिखुआ हैं तो क्या हुआ?

एक दिन उन्होंने खंजन देवी को कहा, “गाड़ी तो अब चलाना सीख ही गया हूँ। सोचता हूँ गांव हो आऊँ।”

maan_manthara खंजन देवी ने पूछा, “कब लौटेंगे?”


 

फाटक बाबू बोले, “कल शाम तक। कोई वहां रुकना थोड़े ही है। लोगों को गाड़ी दिखाना है। बस!”

… और फाटक बाबू चल दिए गांव के लिए। खंजन देवी उनके लौटने की प्रतीक्षा करती रहीं। फाटक बाबू लौटे छह दिनों के बाद।

maan_manthara चिंतित खंजन देवी ने पूछा, “आप तो बोले थे कि दूसरे दिन ही लौट आऊँगा, पर इतने दिन लगा दिए?”

फाटक बाबू ने बताया, “जाने में तो एक ही दिन लगा पर आने में पांच दिन लग गए।”

maan_manthara खंजन देवी की चिंता न मिटी। पूछी, “क्यों?”


 

फाटक बाबू ने बताया, “ये कार बनाने वाले भी ग़ज़ब के लोग हैं! जाने के लिए तो पांच गियर बनाए हैं, पर लौटने के लिए सिर्फ़ एक गियर है - (रिवर्स गियर!)।”

12 टिप्‍पणियां:

  1. हा हा हा हा हा हा हा ..फाटक बाबू ज़रूरत से ज़्यादा इंटेलीजेंट है...

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  2. sahi hai bhai ye car banane walo ki galti to hai hi ha ha ha mjedar

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  3. हा हा हा हा हा ......हाय री समझदारी !

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  4. ये हुई न समझ की बात....
    वाह जी वाह !
    आप ने तो फिर हँसी की एक और गोली खिला दी।
    अब हफ़ता हँसते-हँसते निकलेगा ।

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  5. समझदारी वाली बात है ना
    डेली डोज़ हंसी का

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  6. लीजिये, कार बनाने वालों से मिस्टेक।

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  7. हा हा हा हा हा..... बहुत कमीने है कार बनाने वाले..... ;-)

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  8. yaar sister maine aapki ek post padhi aur bas padhta hi chala jaa raha hu..
    bandh liya aapne hame..

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