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रविवार, 1 अगस्त 2010

आराम की ज़रूरत है…!

हंसना ज़रूरी है, क्यूंकि …


हंसने से पाचन तंत्र सुचारू रूप से चलता है।

शादी के बाद बीतते दिनों के साथ फुलमतिया जी की बक-बक करने की आदत बढती ही गई। एक शब्द में अगर कहा जाए तो वह बड़ा ही बातूनी हो गई थी। एक बार वो बीमार पड़ गईं। खदेरन उन्हें डॉक्टर उठावन सिंह के पास इलाज़ के लिए ले गया।

डॉक्टर उठावन सिंह ने उनकी नब्ज़ टटोली और कहा, “आपको कोई खास बीमारी नहीं है, आप बस आराम कीजिए, सब ठीक हो जाएगा।”

डॉक्टर के इस परीक्षण से असंतुष्ट फुलमतिया जी ने पूछा, “लेकिन आपने तो मेरी ज़बान देखी ही नहीं?”

डॉक्टर उठावन सिंह ने कहा, “उसे भी आराम की ज़रूरत है!”

15 टिप्‍पणियां:

  1. हाहाहाहाहाहा,,,,,डॉक्टर भी इसी मर्ज के सताए हुए होंगे। खदेरन ने तो दिल से दुआ दी होगी........हीहीहहीहीहीहीही

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  2. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

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  3. डाक़्टर बेचारा
    सही इलाज ..

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  4. ha ha ha ha ha......bechara doctor bhugtbhogi raha haoga .........

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  5. हा..हाहा..
    --
    मित्रता दिवस पर बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

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  6. behad unda kaha se lati hai itana hansi ka saman ha ha ha hi hi hi

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