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रविवार, 8 अगस्त 2010

प्रवचन

हंसना ज़रूरी है, क्यूंकि …


खूब हंसना हास्य ध्यान योग लगाने के लिए बहुत ज़रूरी है।

प्रवचन


खदेरन उस दिन फिर दोस्तों की मंडली में कुंडली लगा कर बैठ गया। आधी रात तक महफ़िल जमी रही। … और जब वह दोस्तों की महफ़िल में होता है तो क्या होता है अब तक तो आप जान ही गए होंगे।

 

.. तो आधी रात को वह झूमता-झामता हुआ शराब के नशे में धुत्त सड़क पर चला जा रहा था। उसे इस दशा में देख दारोगा दहारन सिंह ने उसे टोका। “ऐ सुन …!”

 

खदेरन बोला, “कया है….?”

 

दारोगा दहारन सिंह दारोगा दहारन सिंह ने पूछा, “अबे! नशे में धुत्त कहां जा रहा है?”

 

 

खदेरन फुलमतिया खदेरन ने पहचानते हुए कहा, “ओह! दारोगा साब! मैं शराब पीने से होने वाले नुकसान पर प्रवचन सुनने जा रहा हूं।”

 

खदेरन फुलमतिया दारोगा दहारन सिंह चौंके, बोले, “इतनी रात को कौन प्रवचन देगा?”

 

खदेरन ने बताया, “फुलमतिया जी, मेरी बीवी।”

 

18 टिप्‍पणियां:

  1. दरोगा शायद यह प्रवचन सुनकर आया था तभी तो नशे में नहीं था.
    बहुत सुन्दर ... मजेदार

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  2. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

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  3. ha ha ha ha ...
    kamal hai..aap kahan se le aati hain ..aisi hansi ki fooljhadiyaan...
    bahut sundar...

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  4. ab etani rat ko daru ke nashe me ghar jayega to pravachan hi sunane ko milega ha ha ha ha

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  5. bahut achha
    bahut hi achha
    bade punya ka kaam kar rahi haiN aap
    abhivaadan svikaareiN.

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  6. हा हा हा हा...क्या हाज़िर जवाब है वो भी नशे की हालत में..प्रस्तुति.बढ़िया लगी..धन्यवाद

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