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सोमवार, 24 मई 2010

एक पुरानी कवित

उफ़..... ! आज आप से रु-ब-रु होने में देर हो गयी... ! कुछ उलझन थी... लेकिन अब आपके नजर कर रही हूँ होल्लर मोरादाबादी की एक मशहूर हास्य-कविता !
नेता भाषण देकर आया।
आ कर नौरकर पर गुर्राया।
मैं आया हूँ थका-थकाया।
पैर दबाओ, रामलुगाया !
रामलुगाया बोला, मालिक !
एक पते की बात बताऊँ ?
भाषण से तो गला थका है,
आप कहें तो गला दबाऊं !!
अगर पसंद आयी यह हास्य-कविता लगा दीजिये दिल खोलकर ठहाका... !

8 टिप्‍पणियां:

  1. एकदम सही कहा रामलुगाया............. हा..हा..हा...हा.... हा... !!!!

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  2. चलो हम लोग मिलकर रामलुगाया नौकरी.कॉम खोल लेते हैं और भर्ती शुरू कर दें कैसा लगा ये विचार ?

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  3. एक पते की बात बताऊँ ?
    भाषण से तो गला थका है,
    आप कहें तो गला दबाऊं !!
    ......bahut khoob!

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  4. नेकी और पूछ पूछ....काश नेकी कर ही डालता रामलुगाया.पूछन की जरुरत के थी...

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