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गुरुवार, 3 जून 2010

जहर

_a_checkpoint03 खदेरन फाटक बाबू से, “आज शाम तक अगर पचास हजार रूपये का इंतजाम नहीं हुआ तो बेइज्जती से बचने के लिए मुझे जहर पी लेना पड़ेगा। क्या आप मेरी मदद कर सकते हैं?”

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फाटक बाबू, “क्या करूँ खदेरन? मेरे पास तो एक बूंद भी नहीं है!”

18 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत मजेदार !,,हर बार की तरह ,,,गुलगुली करता हुआ :) :) :) :) :)

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  2. आईये जाने .... प्रतिभाएं ही ईश्वर हैं !

    आचार्य जी

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  3. हा हा हा हा हा हां बहुत बढ़िया.


    आज मेरी ये अंतिम टिप्पणियाँ हैं ब्लोग्वानी पर.
    कुछ निजी कारणों से मुझे ब्रेक लेना पड़ रहा हैं .
    लेकिन पता नही ये ब्रेक कितना लंबा होगा .
    और आशा करता हूँ की आप मेरा आज अंतिम लेख जरूर पढोगे .
    अलविदा .
    संजीव राणा
    हिन्दुस्तानी

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