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सोमवार, 28 जून 2010

रिश्तेदार

 

हंसी के बारे में …

आज कल जगह-जगह लाफ्टर क्ल्ब खुल  गए हैं। पर्कों मे भी। कुछ लोग सुबह पार्क में जमा हो जाते हैं और ज़ोर-ज़ोर से हंसते हैं। पर दरअसल ये लोग आर्टिफिशियल हंसी हंसते हैं। इस तरह की हंसी का स्वास्थ्य पर कोई साकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।

जब तक हंसी अंदर से न निकले उसका क्या लाभ?

हास्य फुहार :: रिश्तेदार

खदेरन फाटाक बाबू से, “फाटक बाबू आजकल देखता हूं कि आपके यहां कोई रिश्तेदार नहीं आते। कैसे मैनेज किया आपने उनका नहीं आना?”

फाटक बाबू, “बहुत साधारण सा फॉर्मुला अपनाया। जो धनी रिश्तेदार आते थे उनसे मैंने रुपये उधार लेना शुरु कर दिया। और जो ग़रीब रिश्तेदार आते थे उनको उन्हीं रुपयों से क़र्ज़ देना शुरु कर दिया। कुछ दिनों के बाद दोनों ने ही आना बंद कर दिया।”

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14 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तम विचार!
    बढिया हास्य फ़ुहार।
    हा-हा-हा.....

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  2. हा हा हा ...
    शरद जोशी का लिखा..तुम कब जाओगे अतिथि .. पढ़ा है कि नहीं..?यदि नहीं,तो ढूंढ कर पढ़ लीजिए.

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  3. रिश्तेदारों को भागने का आसान तरीका !

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  4. अद्भुत बुद्धि - जय हो! ह: हा: हा:

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  5. chaliye...

    ab khush honge wo.......



    ab koi nahin aataa.....!!


    hansi nahin aa rahi aaj...

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  6. हाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहा

    अच्छा आईडिया है

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