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शुक्रवार, 1 अप्रैल 2011

चाय सुरकना

(शारीरिक अस्वस्थता से, बहुत दिनों तक नेट से दूर रही। पर आज के खास दिन पर इस ब्लॉग पर तो कुछ बनता ही है ना! क्योंकि आज का दिन तो हम मूर्खों का दिन है  ना!!खुलकर मुस्‍कुराना सो रोक नहीं सकी अपने को!!)

फुलमतिया की सहेली है बसमतिया। बसमतिया का पति दहारन दास भारी पियक्कड़ था।

एक दिन बसमतिया डॉक्टर उठावन सिंह के यहां पहुंची। उसके बदन पर ढेर सारे नीले-नीले निशान थे। उसे देख कर डॉक्टर ने पूछा, “तेरी ये गत किसने की? कैसे हुआ?”

बसमतिया बोली, “क्या बताऊं डॉक्टर साहब, कोई बाहर वाले का हाथ थोड़े न है। मुझे नहीं मलूम इससे बचने के लिए मुझे क्या करना चाहिए? इसी लिए तो आपके पास आई हूं। जब भी मेरा मरद देर रात को दारू पीकर, टुन्न होकर घर लौटता है, मुझे इसी तरह, बुरी तरह से पीटता है।”

डॉक्टर उठावन सिंह ने सिर हिलाया और बोला, “इस आफ़त से छुटकारा पाने की सही दवा है मेरे पास। जब भी तुम्हारा मरद दारू पीकर घर आए तो तुम एक गिलास मीठी चाय लेकर सुरकना शुरु कर देना। सिर्फ़ सुरकते जाना, सुरकते जाना, उसे गटकना मत। तब तक सुरकते जाना जब तक वह सो न जाए।”

दो सप्ताह बाद बसमतिया डॉक्टर उठावन सिंह के पास पहुंची। उसका चेहरा ऐसे खिला हुआ था मानों उसे नई ज़िन्दगी मिल गई हो।

चहकते हुए बसमतिया बोली, “डॉक्टर साहब! क्या धांसू आइडिया बताया आपने! जब भी मेरा मरद घर आता, मैं तो बस मीठी चाय सुरकना शुरु कर देती । सुरकते ही जाती। सुरकते ही जाती। पिछले दो सप्ताह से मार-पीटाई तो दूर, उसने मुझे छुआ तक नहीं।”

डॉक्टर उठावन सिंह ने मुस्कुराते हुए कहा, “देखा मुंह बंद रखने का कितना फ़ायदा होता है!!”

14 टिप्‍पणियां:

  1. हा हा!! चलो कम से कम बसमतिया तो समझ गई...

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  2. आपकी हास्य फुहार की चुटकी से मन हुआ प्रसन्न
    प्रथम अप्रेल की सुबह सुबह ही खूब कसा है व्यंग
    हँसते हंसते कभी तो मेरे ब्लॉग पर भी आईये
    अपने व्यंग के तीर वहां भी चला जाईये .

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  3. अच्‍छा रहा यह पीना-पिलाना.

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  4. आनंद दायक रहा यह सब ..हा..हा..हा...

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  5. हा-हा-हा ...
    मज़ेदार!
    काश सब घर में यह फॉर्मूला चल पड़े !

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  6. :) :) सब यहाँ बहुत बोल रहे हैं ...घर में तो बिना चाय पिए ही मुँह बंद रहता है :):)

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  7. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (2.04.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

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  8. बहुर ही मजेदार रहा मै पहले कुछ और ही समझ रही थी |

    अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखे और जल्द स्वस्थ हो कर फिर से ब्लॉग जगत में वापस आये और हमें हंसा हंसा कर हमारा खून बढ़ाये |

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