समर्थक

शुक्रवार, 15 अप्रैल 2011

स्वर्ग

फुलमतिया कोई किताब पढ रही थीं। पढते-पढते कुछ हाथ लगा। चहकते हुए बोलीं, “देखो इस किताब में लिखा है कि स्वर्ग में पति-पत्नी को अलग-अलग रखा जाता है।”

खदेरन ने निर्विकार भाव से कहा,“इसलिए तो उसे स्वर्ग कहा जाता है!”

14 टिप्‍पणियां:

  1. हा हा ...लेकिन यहाँ अलग अलग रहते ऐसी अनुभूति नहीं होती ..( बहुत लोग अलग भी हो जाते हैं )

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (16.04.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

    उत्तर देंहटाएं
  3. स्वर्गीय होकर स्वर्गीय आनंद उठाने की कुंजी!!

    उत्तर देंहटाएं
  4. bahut der baad aan huyaa....lekin jab bhi aayee hoon hanse bina nahi rah saki!
    aap kmal ka likhti hain!

    उत्तर देंहटाएं