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गुरुवार, 14 अप्रैल 2011

तीन पेड़

खदेरन आज फिर अपानी मंडली पहुंच गया। बुझावन पेग पे पेग दिए जा रहा था। खदेरन उसे समझा रहा था। पर वो  मान ही नहीं रहा था।

खदेरन ने कहा, “अब बस कर बुझावन! घर भी जाना है कि नहीं?”

बुझावन बोला, “आज तब तक  पिएंगे … तब तक पिएंगे … जब तक कि सामने वाले तीन पेड़ छह न दिखने लगे।”

खदेरन ने सामने की ओर देखा और चिल्लाकर बोला, ‘अबे घोंचू! बस करो! सामने एक ही पेड़ है!!”

11 टिप्‍पणियां:

  1. मज़ेदार मज़ेदार मज़ेदार मज़ेदार

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  2. आज हास्य फुहार पर एक साथ तीन तीन पोस्ट क्यों लगा दिया है आपने???

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  3. थोड़ी और पीने देते तो 3 के 6 भी दिखने लगते।

    मेरा ब्लॉग भी देखें
    भले को भला कहना भी पाप

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