समर्थक

मंगलवार, 12 अप्रैल 2011

ब्रेक अप

तो यह मान लूं कि अब हमारे बीच कुछ नहीं रहा।”

“हां।”

“उफ़! मैं तुम्हें भुला नहीं सकता!!”

“यह तुम्हारा प्रोबलम है।”

“तुम मेरे सारे लव लेटर वापस कर दो!”

“ये टोकड़ी सामने पड़ी है। इसमें से जो तुम्हारे हों निकाल लो।”

“तुम्हें जो मैंने हीरे की अंगूठी पहनाई थी, वह दे दो। उसे देखे कर तुम्हें याद किया करूंगा।”

“तुम यह सोच कर मुझे याद करना कि मुझसे तुमने रिंग मांगी थी, लेकिन मैंने नहीं दी।”

13 टिप्‍पणियां:

  1. सच में, कुछ तो रहे याद करने के लिये।

    उत्तर देंहटाएं
  2. हृदयस्पर्शी रचना है |
    उम्दा शब्दों का इस्तेमाल किये हैं
    बहुत बहुत धन्यवाद|

    ----------------------
    एक मजेदार कविता के लिए यहाँ आयें |
    www.akashsingh307.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  3. यह घटना ज्यादा लम्बे समय तक यद दिलाती रहेगी. :)

    उत्तर देंहटाएं
  4. हा हा हा हा बिल्कुल वाजिब रीजन है भाई यद रखने का

    उत्तर देंहटाएं
  5. हा-हा-हा....
    क्या ये फुलमतिया जी के शब्द हैं?
    न भी हो तब भी मज़ेदार हैं ... याद रखने के लिए।

    उत्तर देंहटाएं
  6. इस बात पर एक बहुत सीरियस लघुकथा याद आ गई .. फिर कभी!!

    उत्तर देंहटाएं