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गुरुवार, 5 मई 2011

भोजन

वहां स्वस्थ्य की चर्चा चल रही थी।

खदेरन भी उपस्थित था।

सभा के संचालनकर्ता ने पूछा, “वह कौन सा भोजन है जो खाने के वर्षों बाद भी हमारा पीछा नहीं छोड़ता, हमें दुख-तकलीफ़ ही देता है?”

सारे सभागार में एक चुप्पी छा गई।

खदेरन ने चुप्पी तोड़ी। बोला, “'Wedding Cake'....”!!!

11 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छा है हमने केक नहीं काटा :)

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  2. मज़ेदार!
    बढ़िया केक है!
    जो खाए सो पछताय, जो न खाए वो भी पछताए!!

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  3. बहुत खूब. हा हा हा हा
    सुबह सुबह हंसाने के लिए शुक्रिया. आशा है कि दिन अच्छा गुजरेगा.

    दुनाली पर स्वागत है-
    ‌‌‌ना चाहकर भी

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  4. वाह, कभी नहीं पीछा छोड़ता है।

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  5. जी आपके ब्लाग पर पहली बार आया हूं। सच में भारी भरकम शब्दों से सजे लेख, गजल और कविताएं पढने के बाद थोड़ा हंसने का मन भी हो रहा था। जो आपके ब्लाग ने पूरा कर दिया।
    अच्छी रचना... हाहहाहाहहाहहाहाहा

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  6. हम तो एन्जॉय करते हैं.. केक पाना और खाना दोनों!!
    (पत्नी बगल में हैं इसलिए ऐसा लिखना पड़ रहा है)
    -सलिल

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  7. सच ही तो कहा है खदेरन ने...!!

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