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शुक्रवार, 27 मई 2011

यात्रा और गर्मी

चारो लॉन में बैठे थे।

फुलमतिया जी, खदेरन, फाटक बाबू और खंजन देवी।

बातचीत विभिन्न विषयों पर होता हुआ यात्रा और गर्मी पर आ गयी।

vcm_s_kf_repr_51x67खंजन देवी, “इतनी गर्मी पड़ रही है, मन करता है किसी ठंडी जगह घूम आते।”

 

vcm_s_kf_m160_48x48खदेरन ने कहा, “मैं लंदन जाने की सोच रहा हूं।”

 

vcm_s_kf_m160_53x48फाटक बाबू सतर्क हुए। बोले, “खदेरन! वहां जाने में तो बहुत पैसा ख़र्च होगा।”

 

vcm_s_kf_repr_48x48फुलमतिया जी ने व्यंग्य कसा, “सोचने में पैसे ख़र्च नहीं न होते फाटक बाबू!”vcm_s_kf_m160_48x48

8 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (28.05.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

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  2. अच्छा है बहुत अच्छा है .काश सोचने ,बोलने ,पे पैसे खर्च होते तो हर आदमी पहले तौलता फिर बोलता .

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