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रविवार, 1 मई 2011

आज मज़दूर दिवस है

इस चित्र को देखें। कुछ मन में आए तो कहें ….

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एक शीर्षक हमारी तरफ़ से …

सो जाते हैं फुटपाथ पर अख़बार बिछाकर

मजदूर  कभी  नींद  की  गोली  नहीं खाते!

7 टिप्‍पणियां:

  1. पूस की रात भी नहीं न हल्कू खेत की रखवाली पर है पर थककर आराम करने का वक्त है | सोने दो |
    --- अमरनाथ मधुर

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  2. मेहनशकशों को स्वाभाविक नींद आ जाती है।

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  3. ye natural neend hai.

    बहुत सुन्दर लिखा आपने. बधाई.
    आपका स्वागत है.
    दुनाली चलने की ख्वाहिश...
    तीखा तड़का कौन किसका नेता?

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  4. स्वेद बहाने वाले कब बिछौने तलाशते हैं
    श्रमिक कहीं भी चैन से सो जाते हैं

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  5. तस्वीर खुद बोल रही है, हम क्या बोलों.

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  6. मानव और मानवेतर प्राणी के बीच का नैसर्गिक प्रेम....

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