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शनिवार, 21 मई 2011

इम्तहान

फुलमतिया जी, आपको तो मालूम ही है यदा कदा खदेरन का इम्तहान लेती रहती हैं।

आज भी इसी उद्देश्य से उन्होंने खदेरन से कहा, “जानू! तुम एक लाइन में कुछ ऐसा बोलो कि मैं ख़ुश हो जाऊं और जल जाऊं!”

हुक्म की तामील करते हुए खदेरन ने कहा, “जान, आप मेरी ज़िन्दगी हैं, और … और … और … लानत है, ऐसी ज़िन्दगी पर!”

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