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सोमवार, 28 दिसंबर 2009

बेलन महिमा -6

बेलन महिमा -6
………………………………..बेलन महिमा – 5 के बाद

बात आगे बढ़ी,
वामांगिनी की त्योरी चढ़ी,
अंदर का क्रोध जगा,
और उनके हाथ का बेलन उत्तमांग के सिर पर लगा।

घर की कलह और ख़ाविंद के ख़ुद के गुस्से ने
प्रिय को पथ से भटकाया
आब देखा ना ताब
पंखे से रस्सी का फंदा लटकाया
स्टूल पर चढ़ उसे गले में डालने के लिए हो गये तैयार
तभी प्रिया की आई ज़ोर से फटकार

“मरना है तो मरो
पर, जो भी करना है ज़ल्दी करो”

......अभी..... ज़ारी है ....
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अगर पसंद आया तो ठहाका लगाइगा
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13 टिप्‍पणियां:

  1. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  2. kuch jyada hee beraham nahee ho gai patneejee ? lagataa hai pati bhee natakkar hee honge ! ha ha ha ha

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  3. बेलन महिमा अपरंपार ......... बहुत मज़ा आ रहा है ...
    नव वर्ष की बहुत बहुत मंगलकांनाएँ ...........

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  4. वाह.. उनको भी लगा। मज़ा आ गया। हा-हा-हा-हा-.... बहुत-बहुत धन्यवाद
    आपको नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  5. बेलन महिमा अपरंपार ......... बहुत मज़ा आ रहा है ...
    नव वर्ष की बहुत बहुत मंगलकांनाएँ ...........

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  6. बेलन महिमा पढ़कर एक वाकया याद आया...

    बार-बार अपने पड़ोस के पती-पत्नी को ठहाके लगाते देख
    पड़ोसी ने दोनों को घर खाने में बुलाया,
    भोजन के पश्चात उनकी हंसी का राज पूछा-
    पती ने हंसते हुए कहा-
    इसमें कौई नई बात नहीं है
    मेरी पत्नी रोज मुझे बेलन से मारती है...!
    जब लग जाता है
    तब वो ठहाके लगाती है,
    जब बच जाता हूँ
    तब मै ठहाके लगाता हूँ।

    हा हा हा..
    पसंद आया !!
    ठहाके लगाइए।

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  7. ha...ha..ha
    ye majaak majaak men jaan dene par baat aa gayi.
    aisa khatarnaak majaak ")

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