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शुक्रवार, 4 दिसंबर 2009

बत्तीसी

अगर पसंद आया तो दिल खोलकर ठहाका लगाइएगा।

दो आदमी झगड़ रहे थे।

पहले ने कहा, “तू अपने आप को समझता क्या है? मैं तुझे यूं ही चुटकी में दबा दूंगा।”

दूसरा बोला, “अच्छा, अपने को बड़ा दादा समझता है। अरे मैं एक ऐसा मुक्का मारूंगा कि चौंसठ के चौंसठ दांत नीचे गिर जाएंगे।”

पास में खड़ा तीसरा अब तक तमाशा देख रहा था। वह बोला, “अरे भाई साहब ! बत्तीस दांत गिरेंगे यह बात समझ में आती है लेकिन चौंसठ दांत गिर जाएंगे यह बात समझ में नहीं आई।”

दूसरा व्यक्ति बोला, “मुझे मालूम था कि तू बीच में ज़रूर बोलेगा। इसलिए इसके बत्तीस के साथ-साथ तेरे भी बत्तीस गिन लिए थे। हो गए न चौंसठ के चौंसठ।”

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अगर पसंद आया तो ठहाके लगाइएगा
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8 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत मज़ेदार। हा-हा-हा-हा-...

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  2. Aapke blog kaa sheershlekh.....".....hani kaa bahanaa dhoondho" mere jevan ka aadhaar hai...aur "bila shart-o-swarth, sab be pyaar karna" mera prayaas hai. Nok-jhoonk bahut kartii hain aap. sabhi rachnayein A1 hain..badhai aur likhte rahne ka aagrah. Meri shubhkaamna hai ki hasya-phuhaar se hasya-nirjhar banein.

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  3. चुटकुला पुराना है मगर है मजेदार ....!!

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  4. जोर जोर से ठाहका लगा रहें हैं ।

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