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बुधवार, 22 सितंबर 2010

तीन गो बुरबक! (थ्री इडियट्स!)

तीन गो बुरबक! (थ्री इडियट्स!)

हमरे गांव में भी तीन गो बुरबक है। उ का है कि जब से एगो फ़िलिम का हिट हुआ गांव के पराइमरी ईसकूल के गुरुजी अपना नाम वीर सिंह से भायरस कर लिहिन हैं और उनका चेला रामचन्नर से नाम बदल कर रैन्चो रख लिहिस आ दूसरा त रजुआ था ही।

त एक दिन किलास में भायरस गुरुजी पूछे, "जिस सभा में एगो लोग  बोले और बांकी सब सुनें, उसे क्या कहते हैं, बोलो?

त टप्प से रैंचोआ बोला, "सोकसभा!"

भायरस गुरूजी परसन्न हुए और दोसरका प्रस्न दाग दिए, "आ ई बताओ कि जिस सभा में सब लोग बोले और कोई नहीं सुने, उसे का कहते हैं, बोलो-बोलो?”

राजुआ मुंह खोले इसके पहिले रैंचोआ फेर टपका बोला, "लोकसभा!"

21 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी प्रस्तुति। राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।
    काव्य प्रयोजन (भाग-९) मूल्य सिद्धांत, राजभाषा हिन्दी पर, पधारें

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  2. लोक सभा , विधान सभा , नगर परिषद् सभा , कभी-कभी ब्लॉग सभा भी ...:):)

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  3. बहुत बढि़या. अच्छी क्लास.

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  4. बहुत बढ़िया त्तर दिए हा... हा ... हा ...हा...

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  5. भई ये इकदम ठीक रही. सी बी एस इ वालों के पास भिजवा दें

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  6. अरे बाबा
    क्या बात कर दी..........

    बहुत ही उम्दा.

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  7. हा..हा..हा..:-) रैंचोआ भले इडियट हो पर बात पते की कर गया ।

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  8. सही जवाब वाणी जी ने उसको और सही कर दिया

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  9. बहुत बढ़िया प्रस्तुति. ....
    अच्छी कलास है ।

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  10. बहुत अच्छे । कभी-कभी बुरबक भी सही बात कह जाते है ।

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  11. रान्चो महाराज तो हमेसा सही कहत है ना ....

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  12. जबर्दस्‍त। आजकल लोकसभा का यही स्‍वरूप हो गया है।

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  13. मजा आ जाता है यहाँ आकर :) सच्ची ऊर्जा दोगुनी हो जाती है .

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  14. हा..हा..हा..:-) रैंचोआ भले इडियट हो पर बात पते की कर गया ।

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  15. वाह वाह वाह..! क्या खूब कहा..! लोकसभा..!!

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