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सोमवार, 13 सितंबर 2010

गाड़ी रोको!

गाड़ी रोको!

उस दिन फाटक बाबू ट्रेन से कही जा रहे थे। आरक्षित बर्थ पर स्थान ग्रहण करने के बाद खिड़की से बाहर झांका तो देखा चार आदमी बहुत ही धरफड़ी में गेट नं. एक से प्लेटफ़ार्म पर प्रवेश कर रहे हैं। फिर अपना आरक्षित डब्बा खोजने के क्रम में इधर-उधर देखते हैं। तब तक गाड़ी सरकनी शुरु हो गई।


वे चारो गाड़ी की तरफ़ तेज़ी से बढते हैं। तब तक गाड़ी तेज़ रफ़्तार हो गई। चारो गाड़ी के साथा दौड़ना आरंभ कर देते हैं। उनमें से दो के पास सामान था। वे ज़्यादा तेज़ दौड़ते हैं। दो के हाथ में कोई सामान नहीं था। वे उतनी तेज़ी से नहीं दौड़ पा रहे थे। सामान वाले दोनों ने गति बढाई और किसी तरह पौदान पकड़कर गाड़ी में घुसे और फाटक बाबू के बर्थ के पास आकर अपने हाथ का सामान ऊपर की बर्थ पर रखे। तभी उन्हें कुछ ख़्याल आता है। वे चिल्लाने लगते हैं


”गाड़ी रोको…! चेन खींचो…! गाड़ी रोको!”


उनको इस तरह चिल्लाते देख फाटक बाबू ने कहा, “अब आप शोर क्यों मचा रहे हैं? आपने गाड़ी तो पकड़ ही ली।”


उस व्यक्ति ने कहा, “जिन्हें इस गाड़ी से जाना था, वो तो नीचे ही रह गए। हम तो उन्हें सी ऑफ़ करने आए थे।”

25 टिप्‍पणियां:

  1. यदि चेन न खींची गई तो इन्हें सामान उठाने की सेवा का मेवा मिलेगा. बधाई.

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  2. अरे हाँ, चुटकुले से साथ एनीमेटिड स्टफ़ आपकी मेहनत दर्शाता है. बहुत अच्छा लगा.

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  3. बहुत अच्छी प्रस्तुति।

    राष्ट्रीय व्यवहार में हिंदी को काम में लाना देश कि शीघ्र उन्नत्ति के लिए आवश्यक है।

    एक वचन लेना ही होगा!, राजभाषा हिन्दी पर संगीता स्वारूप की प्रस्तुति, पधारें

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  4. हा हा हा हा ! बड़ा मज़ेदार लगा!

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  5. सविता जी, आज का ये पोस्ट पढ़कर एक बहुत पुराना टी. वी. सीरियल याद आ गया, सफरनामा जो कि दूरदर्शन पर बहुत साल पहले हुआ करता था जो मुझे बहुत पसंद था । उसमें भी कुछ ऐसे ही अजीबो गरीब हादसे हुआ करते थे ।

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  6. I want to paste something writen in hindi but its not possible. why?

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  7. क्या बात है ....
    ..........आभार ...

    एक बार पढ़कर अपनी राय दे :-
    (आप कभी सोचा है कि यंत्र क्या होता है ..... ?)
    http://oshotheone.blogspot.com/2010/09/blog-post_13.html

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  8. हा हा हा...! बहुत अच्छी प्रस्तुति। :-)

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